भिवानी। साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा नस्ल की देसी गायों के साथ अब गुजरात की गिर नस्ल की गाय का भी भिवानी में संरक्षण और संवर्धन होगा। श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी में गिर नस्ल सुधार की दिशा में सराहनीय पहल कर रहा है। गोशाला में विलुप्त हो रही गिर नस्ल की पहली बछड़ी पैदा हुई है, जिससे नस्ल सुधार और संवर्धन में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
दरअसल, नगर परिषद के ठेकेदारों द्वारा करीब डेढ़ साल में शहर की सड़कों से बेसहारा गोवंश को पकड़कर गोशाला में छोड़ा जा रहा है। इसी में 19 गिर नस्ल के गोवंश भी शामिल थे। श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी विगत कई वर्षों से देसी गोवंश संरक्षण एवं नस्ल सुधार का कार्य निरंतर वैज्ञानिक और पारंपरिक पद्धतियों के समन्वय से कर रहा है। वर्तमान में गोशाला में साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा नस्ल की देसी गायों पर कृत्रिम गर्भाधान (एआई) एवं चयनित प्रजनन के माध्यम से नस्ल सुधार का कार्य किया जा रहा है। शहर की सड़कों से संरक्षण में लिए गए गुजरात की गिर नस्ल के गोवंश पर भी नस्ल सुधार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। 19 गिर नस्ल की गायों में से दस ने कृत्रिम गर्भाधान से गर्भधारण किया। इनमें छह गायों में से पांच ने बछड़ों और एक ने बछड़ी को जन्म दिया है।
उच्च दुग्ध क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए मशहूर है गिर नस्ल
श्री गोशाला ट्रस्ट के मैनेजर राजेंद्र सिंह ने बताया कि गुजरात की गिर नस्ल विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी दुर्लभ नस्ल है। यह नस्ल अपनी उच्च दुग्ध क्षमता, रोग प्रतिरोधकता और भारतीय जलवायु के अनुकूलन के लिए जानी जाती है। पहली बछड़ी का जन्म भविष्य में गोशाला की नस्लीय गुणवत्ता, दूध उत्पादन और गोवंश संरक्षण प्रयासों को और सशक्त करेगा। शहर की सड़कों से बेसहारा गिर नस्ल के 19 मादा गोवंश को नगर परिषद के ठेकेदारों द्वारा श्री गोशाला भिवानी महम रोड में छोड़ा गया। इनमें 10 गायों ने कृत्रिम-गर्भाधान (एआई) तकनीक द्वारा गर्भधारण किया। इनमें चार गायें और पांच बछड़िया अभी उपचाराधीन हैं। छह गिर नस्ल की मादा गोवंश ने बछड़े और बछड़ियों को जन्म दिया, जिसमें एक बछड़ी और पांच बछड़े हैं।
मैंने 1986 से 2022 तक हरियाणा पशुपालन विभाग में पशुचिकित्सा एवं पशुधन विकास सहायक के पद पर सेवाएं दी हैं। अब श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी में गोसंवर्धन में लगा हूं। बेसहारा सड़कों पर भटकते गोवंश भी उचित देखभाल, संतुलित आहार, स्वास्थ्य परीक्षण और सही प्रजनन तकनीक प्राप्त करें तो उच्च नस्लीय गुण आगे बढ़ा सकते हैं। गिर नस्ल की पहली बछड़ी गोशाला में पैदा हुई है। यह सफलतम प्रयोग रहा है। - डॉ. मोहन लाल बालेश्रा, गोशाला विस्तार अधिकारी, श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी ।
श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी का यह प्रयास सिद्ध करता है कि गोसेवा केवल संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, दीर्घकालिक दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ की जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और स्वास्थ्य तीनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। ट्रस्ट का संकल्प है कि आने वाले समय में देसी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार के इस कार्य को और व्यापक रूप दिया जाएगा ताकि भारतीय गोवंश की अमूल्य विरासत सुरक्षित रह सके। -मोहनलाल अग्रवाल, अध्यक्ष, श्री गोशाला ट्रस्ट भिवानी।