करीब चार साल पहले 30 लाख की लागत से लगाई गई चार ट्रैफिक लाइट की मरम्मत के लिए नगर परिषद के पास बजट नहीं है। इन्हें ठीक करने के लिए साढ़े सात लाख रुपये की जरूरत है। विगत ढाई-तीन साल से ट्रैफिक लाइट खराब हैं, नतीजतन शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरीके से प्रभावित हो रही है।
वर्ष 2011-12 में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए शहर में चार मुख्य स्थानों घंटाघर चौक, हांसी गेट चौक, दादरी गेट और चिडियाघर मोड़ के पास ट्रैफिक लाइट लगाई गई। ट्रैफिक लाइट शुरू होने के बाद सहीं टाइमिंग नहीं होने के कारण सभी ट्रैफिक लाइटों वाले स्थानों पर जाम लगने लगा और लाइटें बंद कर दी गई। पिछले करीब दो साल से नगर परिषद अधिकारी यही जवाब दे रहे है कि दिल्ली से इंजीनियर को बुलाकर टाइमिंग सही कराई जाएगी। जिसके बाद लाइटों को चलाया जाएगा।
अब दिल्ली से पहुंचे इंजीनियर ने जांच के बाद लाइटों में तकनीकी खामी बता दी है। इनके करंट बोर्ड व अन्य तकनीकी समस्याएं बताई गई है। साथ ही इन समस्याओं को ठीक करने के लिए करीब साढ़े सात लाख का खर्च बताया है। साढ़े सात लाख का खर्च सुनकर नप अधिकारियों की सांसे फूल गई। नप अधिकारियों का कहना है कि नप की आर्थिक हालत फिलहाल ठीक नहीं और साढ़े सात लाख का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं है।
जाम बनता है परेशानी, शुरू की जाए ट्रैफिक लाइट
ट्रैफिक लाइटों के बंद होने के मामले को कोर्ट में ले जाने वाले अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने बताया कि लाइटें बंद होने के कारण शहर के सभी मुख्य मार्गों खासकर महम गेट, घंटाघर चौक, हांसी गेट पर जाम की स्थिति रहती है। इतनी राशि खर्च कर इन्हें लगाया गया तो प्रयोग क्यों नहीं किया गया।
शहर में बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी। नप कर्मचारियों की लापरवाही के कारण इनका प्रयोग नहीं किया जा सका और अब बिना प्रयोग के ही लाइटें खराब हो गई। लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
विजय पंचगावा, पूर्व प्रधान, नगर परिषद
इंजीनियर बुलाकर ट्रैफिक लाइटों की जांच करवाई गई है। लाइटों में तकनीकी खामी है और इंजीनियरों ने साढ़े सात लाख रुपये का खर्च बताया है। फिलहाल नगर की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। जिस कारण इन्हें तुरंत ठीक नहीं करवाया जा सकता।
संजय यादव, सचिव, नगर परिषद