क्या आपके यहां से हर रोज कचरा उठता है। क्या आप सफाई से संतुष्ट है। इस तरह के सवाल केंद्रीय सर्वेक्षण के लिए पहुंची टीम ने विभिन्न बाजारों में दुकानदारों से पूछे। अधिकतर जगह लोगों ने सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई। डस्टबिन नहीं होने के कारण कचरा जगह-जगह बिखरा मिला। पब्लिक टॉयलेट और कम्यूनिटी टॉयलेट टीम सदस्य के पहुंचने से पहले ही साफ-सुथरे नजर आए। अब ये ही मार्क्स दिलाएंगे मगर अन्य तकनीकी जरूरतें जागरूकता बोर्ड, खराब उपकरण, कचरे का उठान नहीं होना शहर की रेटिंग गिराएंगे।
केंद्रीय सर्वेक्षण के तहत दो के दौरे पर भिवानी आई क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम सदस्य दूसरे दिन भी शहर की सफाई व्यवस्था, संसाधनों, स्टाफ, शौचालय के हालात के बारे में जानकारी जुटाती रही। टीम से सीनियर एसेसर सुशील कुमार नगर परिषद के डॉक्यूमेंट की जांच करते रहे वहीं जूनियर एसेसर सुनील कुमार ने शहर के पब्लिक टॉयलेट, कम्यूनिटी टॉयलेट, स्कीम के तहत घरों में बनाये गए टॉयलेट की जांच की। कहीं व्यवस्था ठीक मिली तो कही बदहाल। जूनियर एसेसर सुनील कुमार ने निरीक्षण के दौरान शहर के बिचला बाजार, हनुमान ढाणी में दुकानदारों से बातचीत कर सफाई के बारे में फीडबैक ली। उन्होंने दुकानदारों से पूछा कि सफाई हर रोज होती है या नहीं। कचरा कहां डाला जाता है और कितनी बार सफाई होती है। सफाई को लेकर दुकानदारों ने नाराजगी जताई। कुछ ने सफाई नहीं होने की बात कही तो काफी ने कहा कि सुबह एक बार सफाई होती है। कचरा सड़क किनारे इधर-उधर फेंका जाता है। जूनियर एसेसर ने घंटाघर चौक के शौचालय, देवसर चुंगी स्थित शौचालय, नेहरू पार्क के पास निर्माणाधीन शौचालय का निरीक्षण किया। सोमवार सायं को सब्जी मंडी, अनाज मंडी का भी निरीक्षण किया गया। सब्जी मंडी में भारी अव्यवस्थाएं मिली। नगर परिषद में खराब पड़े ट्रैक्टर व अन्य संसाधनों के भी फोटो खिंच सेंड किए गए।
बाजारों में नहीं मिले डस्टबिन न डंप प्वाइंट
सर्वेक्षण के दौरान पहुंची टीम को शहर में अधिकतर जगह डस्टबिन ही नहीं मिले। मुख्य समस्या रही कचरे के डंप प्वाइंट की। शहर में कचरे के डंप प्वाइंट ही निर्धारित नहीं है। लोगों का जहां मन किया वहीं कचरा फेंक ढेर बना रहे है। निरीक्षण के लिए पहुंची टीम के सामने भी यह बात आई और जिन लोगों के घरों के आसपास कचरे के ढेर है उन्होंने आपत्ति भी जताई। डस्टबिन की बात की जाए तो कुछेक स्थानों को छोड़ कहीं भी डस्टबिन नहीं है।
न जागरूकता के लिए प्रयास, न कम्यूनिकेशन की व्यवस्था, साधन भी ठप
सर्वे में सफाई व्यवस्था बदहाल मिली तो तकनीकी खामियां भी उबरकर सामने आई। इनमें प्रमुख है जागरूकता के लिए कोई प्रयास न होना। नगर परिषद की ओर से शहर में स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। सफाई कर्मचारियों के कम्यूनिकेशन के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकतर संसाधन भी खराब है।
चाहिए सवा पांच सौ कर्मचारी, डस्टबिन व अन्य संसाधन
केंद्रीय सर्वेक्षण के लिए पहुंची टीम ने नप अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के लिए सलाह भी दी। जिसमें मुख्य स्टाफ की कमी को पूरा करना है। टीम सदस्यों ने बताया कि शहर को देखते हुए यहां कम से कम सवा पांच सौ सफाई कर्मचारियों की जरूरत है। नप के पास फिलहाल 199 नियमित और 150 अनुबंधित सफाई कर्मचारी है। इनमें भी करीब एक सौ विभिन्न अधिकारियों के आवास, सरकारी दफ्तरों, क्लेरिकल कार्य, नप कार्यालय या अन्य ड्यूटी में व्यस्त है। संसाधनों की बात की जाए तो न डस्टबिन पर्याप्त है और न ही कचरे के उठान के लिए पर्याप्त संसाधन। लोगों को जागरूक करने पर भी टीम ने जोर दिया।
आप भी करें प्रयास
टीम सदस्यों और नप अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान आमजन से भी स्वच्छता में सहयोग करने का आह्वान किया और कहां कि आप भी स्वच्छता के लिए प्रयास करें। टीम सदस्यों ने कहा कि कचरा इधर-उधर फेंकने की बजाए एक डस्टबिन बनाकर उसमें रखे और सफाई कर्मचारी आने के समय उनके ट्रैक्टर या टैंपों में डाले। खुद भी स्वच्छता के प्रति जागरूक हो और अन्य को भी करें।
शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। कर्मचारी प्रयासरत है। संसाधनों की कमी है, उसे पूरा करने के लिए प्रयाए किए जाएंगे। डस्टबिन खरीदे जाएंगे और खराब संसाधनों को ठीक करवाया जाएगा। हमें उम्मीद है कि शहर की रेटिंग में सुधार होगा।
हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी,
नगर परिषद