मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं, गूंगा या गुलाम नहीं। मैं पार्टी के साथ हूं, मगर 2019 में यदि पिछड़े वर्ग को नेतृत्व में कम आंका गया तो जनता स्वयं फैसला करेगी। अपने तीखे बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले सांसद राज कुमार सैनी ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से विपक्षियों, जाट नेताओं और अपनी ही पार्टी में उनका विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया। कार्यकर्ताओं को 29 अक्तूबर के कुरुक्षेत्र में होने वाले समारोह का न्यौता देने के साथ-साथ एचसीएस भर्ती पर भी सवाल उठाए।
सांसद राज कुमार सैनी रविवार देर सायं करीब साढ़े छह बजे सेक्टर 13 में अमन राघव तंवर के घर पहुंचे। पहले कार्यकर्ताओं से बातचीत की और एकजुट रहने का संदेश दिया और 29 अक्तूबर को कुरुक्षेत्र में होने वाले समारोह का न्योता दिया। सांसद सैनी ने कहा कि समान अधिकार, समान रोजगार, समान विकास समारोह होगा। उन्होंने कहा कि एक पिछले 25 सालों से एक जाति विशेष राज कर रहा है। किसी के परिवार में सभी अधिकारी तो सौ-सौ कुनबों में कोई चपड़ासी भी नहीं। आईएएस, आईपीएस मैरिट होल्डर, फिर भी आरक्षण की भीख मांगते है।
नेतृत्व परिवर्तन पर बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पूरी तरह ईमानदार हैं, मगर कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए परिवर्तन की मांग कर रहे है। वे कुर्सी से दूर नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत लोग 60 प्रतिशत के हक ले रहे है। 30 प्रतिशत होने का दावा करने वाले जाति विशेष के लोग यदि अपने आप को 11 प्रतिशत भीसाबित कर देंगे तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
अपनी ही पार्टी के कुछ मंत्रियों द्वारा दी गई अनुशासन में रहने की नसीहत पर उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का सिपाही हूं, गूंगा या गुलाम नहीं। एचसीएस भर्ती पर उनहोंने कहा कि उन्हें गड़बढ़ी का अंदेशा है। एक जाति विशेष के ही लोग इसमें है। क्या अन्य के ब्रेन घास चरने गए है। इस मौके पर अमन राघव तंवर, राजेंद्र कुमार आदि अनेक मौजूद रहे।
फिर दिखाए बागी तेवर
सैनी ने एक बार फिर इशारों-इशारों में बागी तेवर दिखाए और कहा कि 2019 में यदि पिछड़े वर्ग को उनके अधिकार नहीं दिए, सम्मान नहीं दिया, नेतृत्व नहीं दिया और पैसेंजर गाड़ी में ढ़ोने तक सीमित रखा तो वे रास्ता अलग कर सकते हैं। इनेलो की ओर से देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराने की बात पर उन्होंने कहा कि जातिवाद की बात तो वे करते है। उनके अनुसार तो उनकी जाति के लोगों के अलावा अन्य को प्रदेश में रहने का अधिकार ही नहीं। मुकदमा तो उनके खिलाफ दर्ज होना चाहिए।