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शाकाहार इंद्रजीत को रियो में खाने की टेंशन

Thu, 07 Jul 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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शाकाहारी - फोटो : अमर उजाला
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 पहली बार ओलंपिक खेल में जा रहे देश के स्टार एथलीट इंद्रजीत सिंह के कोच तैयारियों से संतुष्ट हैं, उन्हें तो बस एक चिंता सता रही है, रियो (ब्राजील) में भोजन की। दरअसल इंद्रजीत सिंह विशुद्ध शाकाहार हैं और रियो में केवल चावल-ब्रेड व फ्रूट ही उपलब्ध हो पाएंगे। यहां तक कि चपाती और सब्जी भी नसीब होनी मुश्किल है। कोच का मानना है कि खिलाड़ी को मनचाही डाइट न मिलने का असर कहीं न कहीं तो पड़ता ही है।
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इंद्रजीत के कोच प्रीतम सिंह अमर उजाला को बताया कि रियो द जेनेरिया में शाकाहारी खिलाड़ी के लिए बहुत सीमित विकल्प हैं। चपाती व सब्जी भी वहां मिलनी मुश्किल होगी। इंद्रजीत सिंह शाकाहारी हैं, इसलिए रियो में उन्हें चावल-ब्रेड, दूध-दही और फ्रूट व जैम के सहारे ही काम चलाना पड़ेगा। इंद्रजीत को इन्हीं सब से काम चलाना पड़ेगा। कोच का मानना है कि शाकाहारी के लिए वहां विकल्प तो कम है, लेकिन इतनी बड़ी बात भी नहीं है। 15 दिन की बात है, जैसे-तैसे काम चला लेंगे। तथ्य है कि डाइट और प्रदर्शन का सीधा संबंध है। लेकिन, इंद्रजीत इतने मजबूत हैं कि जो विकल्प हैं, उनमें से ही रास्ता निकाल लेंगे और ओलंपिक में अपना बेस्ट देंगे।
एशियन चैंपियन इंद्रजीत का कहना है कि रियो ओलंपिक में शायद इंडियन शेफ जाएंगे। यदि इंडियन शेफ जाएंगे तो फिर दिक्कत की बात नहीं है। ऐसा नहीं होता तो दूध-दही, ब्रेड से काम चलाएंगे।
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रोज छह घंटे बहाते हैं पसीना
विकट आर्थिक परिस्थितियों के बीच अपना मुकाम बनाने वाले इंद्रजीत के बारे में कहा जाता है कि वह अनुशासन के पक्के हैं। इंद्रजीत यहां भीम स्टेडियम में अपने कोच के साथ हर रोज सुबह-शाम छह घंटे प्रैक्टिस करते हैं। आधा समय शॉट-पुट पर देते हैं और आधा फिटनेस पर। कोच प्रीतम की देखरेख में दिन के एक सेशन में इंद्रजीत वेट ट्रेनिंग, स्ट्रैंथ ट्रेनिंग व कंडीशनिंग ट्रेनिंग कर रहे हैं तो दूसरे सेशन में थ्रो की प्रैक्टिस करते हैं।

इंद्रजीत बोले, हौसला मजबूत, बेस्ट देंगे
देश में सबसे पहले रियो ओलंपिक क्वालीफाई करने वाले इंद्रजीत को मेडल के दावों में कोई यकीन नहीं है। वे मानते हैं कि मेडल के दावे करना खुद पर प्रेशर बढ़ाना है। इस वक्त केवल इतना कहना चाहेंगे कि हौसले मजबूत हैं और रियो में वे अपना बेस्ट देंगे। देश के लोगों का प्यार लेकर रियो जा रहे हैं। परसों हुई मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोत्साहन दिया।
कोच प्रीतम सिंह ने बताया कि इंद्रजीत में पॉवर, तकनीक व स्पीड का गजब तालमेल है। यह तालमेल ही उसे अनूठा खिलाड़ी बनाता है। बकौल प्रीतम सिंह, वे मेडल के बारे में बोलना नहीं चाहते। इस समय वे केवल इतना कहेंगे कि रियो में इंद्रजीत अपना बेस्ट देगा।

छह महीने में आठ गोल्ड
शॉटपुट में इकलौते ओलंपिक क्वालीफायर इंद्रजीत सिंह जबरदस्त फार्म में हैं। वर्ष 2015 के पहले छह महीने में इंद्रजीत ने आठ गोल्ड मेडल जीते। फरवरी 2015 में राष्ट्रीय खेलों से शुरू हुआ स्वर्णिम सफर मई में मंगलूर में फेडरेशन कप, चीन में हुए एशियाई चैंपियनशिप, थाईलैंड में हुई तीन ग्रांड प्री सीरिज में हैट्रिक के बाद वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। चीन में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में इंद्रजीत ने 20.44 मीटर चक्का फेंक कर नया मीट रिकार्ड कायम किया। उन्हें प्रतियोगिता को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। इंद्रजीत ने भिवानी के शक्ति सिंह का 15 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
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