पांच जून को महज कुछ घंटे के बाद ही पिछले 24 घंटे में बदले जाट नेताओं के सुर के बाद फिर से आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जाट आरक्षण व अन्य मांगों के लिए आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए बृहस्पतिवार को धनाना के एतिहासिक किले में 12 गांवों की बैठक होगी। बैठक में फैसला होगा कि जाट बिरादरी के लोग 13 जून के कोर्ट फैसले का इंतजार करेंगे या पहले ही धरना शुरू करेंगे। 13 जून के बाद आंदोलन शुरू किया जाएगा तो उसकी शुरूआत कहां से होगी।
पांच जून से जाट आरक्षण आंदोलन की शुरूआत के तहत भिवानी क्षेत्र में सिर्फ धनाना में ही लोगों ने धरना दिया था। वहां भी कुछ घंटे के बाद सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देकर धरना समाप्त कर लिया था। धरना समाप्त करने को लेकर भी कुछ लोगों में रोष है। इसी रोष के चलते मंगलवार को जाट धर्मशाला व धनाना गांव में बैठक भी हुई। अब इसी मसले पर बृहस्पतिवार को 12 गांवों की बैठक होगी। बैठक में धनाना के अलावा आसपास के गांवों जताई, बड़ेसरा, तालू, सिवाड़ा, मुंढाल, पुर, तिगड़ाना आदि गांवों के लोग शिरकत करेंगे। बैठक के लिए समिति सदस्यों गांवों में भी संपर्क साधा।
अलर्ट हुआ प्रशासन, लगाई फोर्स
धनाना में बृहस्पतिवार को होने वाली 12 गांवों की बैठक और मंगलवार को दो जगह हुई जाट बिरादरी की बैठकों के बाद जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। धनाना गांव व आसपास के गांवों में पैरामिल्ट्री फोर्स तैनात रहेगी। शहर के बाहरी क्षेत्रों में बने नाकों पर भी जवानों को अलर्ट किया गया है।
13 से पहले आंदोलन का तुक नहीं: हवा सिंह
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने कहा कि जाट आरक्षण मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में आंदोलन का कोई तुक नहीं। मामले में 13 जून को कोर्ट में सुनवाई है और वे सुनवाई तक इंतजार करेंगे। कोर्ट के फैसले के बाद ही पूरे हालात की समीक्षा की जाएगी और खापों से मिलकर पूरे जाट समाज के साथ भविष्य के कार्यक्रमों का फैसला किया जाएगा।
बुधवार को जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जाटों को आरक्षण नहीं मिला तो आरक्षण का वर्तमान स्वरूप भी यह नहीं नहीं रहने दिया जाएगा। प्रत्येक 10 साल के बाद आरक्षण में शामिल जातियों को शामिल रखे जाने या नहीं रखने का रिव्यू होना चाहिए मगर अब तक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में मुरारीलाल गुप्ता ने जाट आरक्षण के विरोध में जो याचिका लगाई है, वह जातीय द्वेष के तहत लगाई है। इसमें केवल बीसी-सी कैटेगरी के विरोध में याचिका लगाई, जिसके तहत जाटों को आरक्षण दिया गया। इस मौके पर युवा प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट सत्यजीत पिलानिया, रघुबीर सिंह बूरा, एडवोकेट राजनारायण पंघाल, एडवोकेट विरेंद्र दूहन, जोगेंद्र आदि मौजूद रहे।
जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष मान बोले, आरक्षण को लेकर धरने गलत, जाटों में फूट न डालें मलिक
अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष व हरियाणा खाप प्रवक्ता ओमप्रकाश मान ने जाट आरक्षण के विरोध में कोर्ट में दायर की याचिकाओं को ईर्ष्या पूर्ण कहने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का विरोध करने वाले लोगों को माफी मांगनी चाहिए। आरक्षण के लिए चल रहे धरनों को औचित्यहीन बताते हुए मलिक ने कहा कि यशपाल मलिक को जाटों में फूट नहीं डालनी चाहिए।
बुधवार को जारी बयान में मान ने कहा कि सरकार 36 जातियों को पहले ही आरक्षण दे चुकी है, उसमें केवल 6 बिरादरी को आरक्षण से वंचित करके उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। इस बाबत प्रदेश की सभी खाप सरकार से 2 जून को पंचकूला की मीटिंग में आरक्षण के लिए पांच जून से प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित करने का वायदा कर चुकी थीं। सरकर ने जाट समाज को आंदोलन के दौरान मारे गए युवकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी, कोर्ट में आरक्षण की पैरवी तथा झूठे मुकदमे वापस लेकर युवाओं को रिहा करने का आश्वासन दिया है।
मान ने यशपाल मलिक गुट द्वारा दिए जा रहे धरने को गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि धरने से खापें और दूसरे संगठन दूर हैं। अगर खापें साथ देतीं तो धरने में 10-20 लोग ही नहीं दिखाई देते। आरक्षण को जाटों का हक बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे-बुजुर्ग सब इस मुद्दे पर साथ हैं।
जाटों में फूट न डालें मलिक
ओमप्रकाश मान ने कहा कि जब सरकार से समझौता हो गया तो अलग से धरने कर मलिक को जाटों में फूट नहीं डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वादे से मुकरती और धोखा करती है तो सब मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि खापें किसी धरने का समर्थन नहीं कर रही हैं।