शहादत देने से पहले कुलदीप ने अपनी बटालियन को ऐसी तरकीब सुझा दी जिससे हजारों जिंदगियां आगजनी की घटना की चपेट में आने से बच गई। आग फैलती देख कुलदीप ने सूझ-बूझ दिखाते हुए रिहायशी सेक्टरों में साथी कर्मचारियों को पानी का छिड़काव करने का मशवरा दिया। वीर कुलदीप के मशवरे को उचित मानते हुए तुरंत इस पर काम किया गया और आज न केवल बटालियन के जवान बल्कि तमाम सैन्य अफसर इस फैसले को खूब सराह रहे है। घटनाक्रम में कुलदीप के साथी रहे सैनिक सवीन कुमार ने मंगलवार को शहीद कुलदीप के पैतृक गांव मैहड़ा में पहुंचकर अमर उजाला से बातचीत में यह वाक्या साझा किया।
महाराष्ट्र के केंद्रीय आयुध भंडार में हुई आगजनी की घटना में शहीद कुलदीप का मंगलवार को पूरे राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव मैहड़ा में अंतिम संस्कार कर दिया गया। सेना व पुलिस जवानों ने शहीद को सलामी देकर अंतिम विदाई दी। 30 मई की रात को गांव मैहड़ा निवासी सिपाही कुलदीप शहीद हो गया था। कुलदीप डीएफसी रेजीमेंट में फायरमैन था। शहीद के साथी जवान सवीन कुमार ने बताया कि 30 मई की रात करीब एक बजे सूचना मिली थी कि आयुध डिपो के सेक्टर 92 में आग लगी है। सूचना मिलने के बाद सेना के निर्देशों के अनुरूप कुलदीप सिंह और उसके छह साथी मौके पर पहुंचे तथा आयुध डिपो में आग बुझाने का कार्य शुरू किया। शहीद कुलदीप सिंह जान की परवाह किए बिना डिपो के अंदर तक जा घुसा और आग पर काबू पाने के भरसक प्रयास किए। उन्होंने साथ लगते सेक्टर को भी पानी से भीगोने का काम किया ताकि आग से आबादी को बचाया जा सके। घटना में जवान कुलदीप बुरी तरह से झुलस गया था। डीएनए टेस्ट के जरिए उनकी अधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई थी।
50 दिन पहले ही रची थी कुलदीप के हाथों में मेहंदी
शहीद कुलदीप सिंह की 17 अप्रैल 2016 को मुकंदपुर बहादुरगढ़ निवासी मिनाक्षी के साथ शादी हुई थी। वहीं, अभी तक अपने बेटे की शहादत की घटना को पिता संतलाल और उसकी माता बेदो से छिपाए रखा गया। दोनों को सोमवार को ही घटना से अवगत कराया गया।