सैनिक, पुलिस समेत सैकड़ों लोगों की हत्या करने वाले मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के लोगों को माफी मिल सकती है तो जाट आंदोलन के दौरान गिरफ्तार आरोपियों को क्यों नहीं मिल सकती है। यदि इनको (आरोपियों) माफी नहीं मिली तो ये लोग आतंकी भी बन सकते हैं। सरकार को चाहिए कि आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों के आरोपियों, चाहे वे किसी भी बिरादरी के हों, को माफी व रिहाई दे।
यह चेतावनी व मांग की है, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष कमांडेंट (रिटायर्ड) हवा सिंह सांगवान ने। अमर उजाला से बातचीत में सांगवान ने कहा कि 1986 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने एमएनएफ के नेता लाल डेंगा व उनके साथियों को माफी दे दी थी तो जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा व तोड़फोड़ के आरोपी कोई आतंकवादी व नक्सली नहीं हैं। इन्हें माफी मिलनी चाहिए। यह फैसला केंद्र व राज्य सरकार को लेना है।
जाट नेता ने आगाह किया कि आरक्षण आंदोलन के आरोपियों को माफी नहीं दी गई तो ये लोग गलत रास्ते पर जा सकते हैं। आतंकी बनकर सरकार का सिरदर्द बन सकते हैं। इसलिए, इन्हें माफ किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि रिहाई और माफी की मांग सब बिरादरियों के आरोपियों के लिए है।