ओह, इट इज वैरी फैंटास्टिक। इट हैव ए लोट ऑफ स्वीट वॉटर इन इट एंड जस्ट लाइक ए मेजेस्टिक ड्रिंक। इट्स ट्रयू दैट इंडियन कल्चर हैज इट्स ऑन इम्पोरटेंस एंड इज मच डिफरेंट विद अदर। कुछ इस तरह के विचार जर्मन से आए विद्यार्थियों के दल ने मतानी गांव के खेतों में मतीरी खाने के बाद व्यक्त किए। विद्यार्थी राजस्थान के गांव नांगल में बीआरजेडी पब्लिक स्कूल में शैक्षणिक भ्रमण के लिए आए हुए है। विद्यार्थी भारतीय संस्कृति एवं खानपान का अध्ययन करने के लिए बुधवार को मतानी गांव में थे।
विद्यार्थियों ने गांव के खेतों में अधिक समय बिताया तथा विभिन्न फसलों एवं सब्जियों के बारे में जानकारी एकत्रित की। इसके अलावा वन क्षेत्र के पेड़ों के बारे में जानकारी ली तथा उनकी उत्पति, विकास एवं जीवन चक्र के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने खेतों में ऊंटों की सवारी की तथा गाड़ी, ट्रैक्टर में बैठकर भारतीय संस्कृति को करीब से जानने का प्रयास किया। ग्रामीणों के अनुरोध पर विद्यार्थियों ने मतीरी, कचरी तथा अन्य सीजनल फ्रूट्स का लुत्फ उठाया। विद्यार्थियों ने गांव के मंदिरों का भ्रमण किया तथा भारतीय देवी देवताओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। गाइड टीचर दल में शामिल मैथियाज एवं लेडी टीचर गैबी ने बताया कि विद्यार्थियों को इंडियन कल्चर बहुत ही अच्छा लगा है।
16 अक्टूबर से 15 दिन के भ्रमण पर है 16 विद्यार्थी
बीआरजेडी पब्लिक स्कूल नांगल के प्राचार्य डॉ. एके पांडेय ने बताया उनका जर्मनी के स्टूगार्ड शहर में स्थित एफएलजी स्कूल से आपसी समझौता है। इसके तहत पिछले पांच वर्षों से एक दूसरे देश की भौगोलिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक जानकारी से रूबरू होने के लिए उनके विद्यालय के बच्चे जर्मनी जाते हैं तथा जर्मनी से बच्चे उनके विद्यालय में आते है। इस बार जर्मनी के विद्यालय के 11 वीं कक्षा के 16 विद्यार्थी पिछले 16 अक्टूबर से उनके विद्यालय के अतिथि है।