फेस्टिवल सीजन की चहल-पहल चरम पर आते ही शहर बाजार इतने संकरे हो जाते हैं कि दो पहिया वाहन की आवाजाही दुष्कर हो जाती है। इस वक्त आधा दर्जन बाजारों की हालत देखकर इस बात की चिंता होने लगती है कि यदि कोई अनहोनी हो गई तो इन बाजारों में दमकल विभाग अपना काम कैसे करेगा। इन भौगोलिक दिक्कतों से निपटने के लिए विभाग की कोई तैयारी नहीं है। न ही कोई वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। इतना ही नहीं शहर में कहीं कोई हाईड्रेंट प्वाइंट भी नहीं है, ऐसे में बार-बार दमकल विभाग की गाड़ियों को विभाग के मुख्य स्टेशन पर ही आना होगा। लोहारू-बहल में कहीं आग लगी तो दमकल विभाग को 65 किलोमीटर का सफर तय करना होगा
शहर में दीपावली पर पटाखों से होने वाली आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के दमकल विभाग अधिकारियों को निर्देश दिए गए है। निर्देशों में गाड़ियों को ठीक करने, दमकल विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों के अवकाश रद करने, वरिष्ठ दमकल केंद्र अधिकारियों को दमकल गाड़ियों का पूर्ण निरीक्षण करने, गाड़ियों के लिए तेल की व्यवस्था करने, आतिशबाजी व पटाखों की दुकानें शहर के बाहर खुले में लगवाने, प्रत्येक दुकान पर दो बाल्टी रेत व पर्याप्त पानी की व्यवस्था करवाने, प्रत्येक दुकान के बीच की दूरी कम से कम तीन मीटर करवाने के निर्देश दिए है।
शहर में नहीं है हाईड्रेंट प्वाइंट
कहने को तो भिवानी दमकल विभाग के पास आठ बड़ी गाड़ियां व एक छोटी गाड़ी है। 35 कर्मचारी है। मगर सभी पानी के लिए पूरी तरह दमकल विभाग कार्यालय व उसके पीछे बने जनस्वास्थ्य विभाग के हाइड्रेंट प्वाइंट पर ही निर्भर है। शहर में कहीं भी कोई भी हाइड्रेंट प्वाइंट नहीं है। बाजारों में इतनी भीड़ है कि दमकल विभाग की बड़ी गाड़ियों को पहुंचने के लिए ही कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। ऐसे में जब तक गाड़ी आग लगने वाले स्थान पर पहुंचेगी तब तक तो काफी नुकसान हो चुका होगा।
संवेदनशील हैं आधा दर्जन बाजार
शहर के आधा दर्जन बाजार आगजनी के लिहाज से संवेदनशील है। इनमें बिचला बाजार मार्केट, किरोड़ी मल मंदिर क्षेत्र, सराय चौपटा, गौशाला मार्केट, सर्राफा बाजार, घंटाघर मार्केट प्रमुख है। यहां कपड़े, तेल आदि ज्वलनशील पदार्थ, प्लास्टिक सामान होने के कारण आग की संभावनाएं ज्यादा रहती है।
पिछले वर्ष हुई थी आधा दर्जन घटनाएं
पिछले वर्ष आगजनी की आधा दर्जन प्रमुख घटनाएं हुई। जिनमें लाखों का सामान जला। जिनमें कृष्णा कॉलोनी में एक प्लास्टिक सामान, क्राकरी के गोदाम में लगी आग, घंटाघर के पास एक जूते-चप्पलों के गोदाम, हनुमान ढाणी श्याम बाग मार्ग स्थित फर्नीचर गोदाम, कौंट रोड कबाड़ियों के दो गोदाम, एमसी कॉलोनी में एक फर्नीचर व प्लास्टिक सामान के गोदाम में आग की प्रमुख घटनाएं है।
पैंसठ किलोमीटर की दूरी नाप कर कैसे बुझाएगी आग
लोहारू, सिवानी, बहल, बाढड़ा आदि क्षेत्र यदि में आग लगी तो दमकल विभाग की गाड़ी पहुंचने से पहले तो सब जलकर राख हो जाएगा। यह हम नहीं कह रहे बल्कि दमकल विभाग की व्यवस्थाएं ही ऐसी है। दरअसल जिले के भिवानी शहर और दादरी शहर में ही दमकल विभाग की गाड़ियां है। भिवानी में आठ बड़ी और एक छोटी तथा दादरी में दो गाड़ियां है। इसके अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों लोहारू, बहल, सिवानी, बाढड़ा आदि क्षेत्रों में आग से बचाव के लिए कोई संसाधन या व्यवस्था नहीं है। 65 से 70 किलोमीटर का सफर तय करने में दमकल विभाग की गाड़ियों को कम से कम एक से डेढ़ घंटा लगेगा।
कर्मचारियों की छुट्टियां रद
दमकल विभाग ने दीपावली पर किसी भी तरह की आगजनी की घटना से निपटने के लिए तैयारी कर ली है। सभी गाड़ियां ठीक हैं और कर्मचारियों की छुट्टियां रद कर दी गई है। बहल, लोहारू, सिवानी बाढड़ा जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए थोड़ी समस्या है मगर भिवानी से ही गाड़ियां भेजी जाएंगी। शहर में हाईड्रेंट प्वाइंट नहीं है।
एसएस मलिक, फायर ऑफिसर