जूई थाना क्षेत्र के एक गांव के निजी स्कूल ने फर्जी एनओसी के सहारे नौंवी से 12वीं कक्षा तक की मान्यता मामले में डीईओ, सरकारी स्कूल हेडमास्टर सहित स्कूल निदेशक व प्राचार्य सहित पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह सारा खेल हुआ। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जुई कलां पुलिस थाना ने स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया है।
बृजपाल सिंह परमार ने फर्जी एनओसी मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर हाईकोर्ट ने पुलिस को 28 दिन के अंदर शिकायत पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। जुई कलां पुलिस थाना के एसएचओ सुनील कुमार ने प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह, सरकारी स्कूल का हेडमास्टर श्रीराम शर्मा, स्कूल निदेशक गजानंद, स्कूल संचालक संदीप और स्कूल प्राचार्य दीक्षा शर्मा के खिलाफ सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करने और धोखाधड़ी कर फर्जी एनओसी के सहारे नौंवी से बारहवीं कक्षा तक मान्यता लेने पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
अधिकारियों ने मिलीभगत कर जांच रिपोर्ट को दबाया
परमार ने शिकायत में आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग से एक निजी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मान्यता संबंधी दस्तावेजों की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी। फायर विभाग ने एनओसी जारी होने से इनकार कर दिया। इस मामले की जिला दमकल अधिकारी ने अपने स्तर पर जांच की और फिर जांच रिपोर्ट अधिकारिक रूप से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजी। संबंधित निजी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने दोनों ही बार निजी स्कूल से मिलीभगत कर रिपोर्ट अपने कार्यालय में ही दबा ली और कोई कार्रवाई तक नहीं की। जबकि सरकारी स्कूल के हेडमास्टर ने फर्जी एनओसी के दस्तावेजों को ही सर्टिफाइड किया था।
एसीएस को भेजी जाएगी शिकायत
बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि निजी स्कूल से मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर भ्रष्टाचार करने वाले जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह श्योराण के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजी जाएगी।
ये था पूरा मामला
एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने दो सितंबर 2014 में दमकल विभाग से एनओसी ली थी। इसके बाद निजी स्कूल से शिक्षा निदेशालय ने नई फायर एनओसी मांगी थी। निजी स्कूल प्रबंधन समिति सदस्यों ने पुरानी एनओसी के साथ छेड़छाड़ करते हुए दो सितंबर 2018 की फर्जी एनओसी तैयार कर ली और इसी के जरिये कक्षा नौंवी से 12वीं तक की स्थायी मान्यता भी हासिल कर ली थी।