हरियाणा सिविल सर्विस की परीक्षा में तीसरी रैंक प्राप्त करने वाले गांव मकड़ाना निवासी मनीष कुमार ने सालों पुराना अपने पिता का सपना साकार कर दिया। एचसीएस मनीष के पिता लिखित परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू से पार नहीं पाए थे। अपना सपना टूटने के बाद उन्होंने अपने बेटे को प्रेरित कर इसे साकार कर लिया। हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में तीसरी रैंक प्राप्त करने वाले मनीष इससे पहले राजस्थान सिविल सर्विस परीक्षा भी पास कर चुके है।
मनीष के पिता धर्मबीर सिंह सिंचाई विभाग से जिलेदार के पद से रिटायर्ड हैं। धर्मबीर सिंह ने भी उस समय एचसीएस की परीक्षा पास की थी लेकिन इंटरव्यू परीक्षा पास नहीं हो पाई थी। तब से ही धर्मबीर ने ठान लिया था कि वह अपने बेटे को एचसीएच अधिकारी बनाएंगे। पिता की प्ररेणा से मनीष ने बीएससी पास करने के बाद पहली बार 2008 में एचसीएस की परीक्षा देने की सोची थी लेकिन उस समय आवेदन के लिए आयु छोटी थी। इसके बाद 2011 में लिखित परीक्षा तो पास कर दी थी लेकिन भाग्यवश इंटरव्यू परीक्षा में सफल नहीं हो सका था। तत्पश्चात मनीष ने एमएससी, बीएड किया। मनीष ने एचसीएस की तैयारी के लिए रोजाना दस से 12 घंटे तक पढ़ाई जारी रखी। मनीष ने बताया कि उसने घर बैठकर यह तैयारी की। किसी प्रकार की कोचिंग आदि का सहारा नहीं लिया। उसके बाद एचसीएस के लिए 2014 में प्री एग्जाम व अप्रैल 2016 में फाइनल एग्जाम हुआ। मनीष ने फिर से लिखित परीक्षा पास की। लिखित परीक्षा पास होने पर 24 अगस्त को मनीष का इंटरव्यू हुआ था। इसमें मनीष को तीसरी रैंक मिली।
परिजनों का मिला है भरपूर साथ
मनीष का कहना है कि मां बिमला देवी, पिता धर्मबीर के अलावा पत्नी व अन्य परिजनों का इस मुकाम तक पहुंचने में उसे भरपूर सहयोग मिला। परिजनों ने समय समय पर उसका मनोबल बढ़ाया। मनीष का युवाओं के लिए संदेश है कि वे जीवन में कभी निराश न हों। सफलता प्राप्त करने के लिए भरसक प्रयास जारी रखना चाहिए।