पिछले वर्ष डेंगू का खौफ दिखा प्राइवेट लैब संचालकों ने मरीजों को खूब लूटा। वायरल बुखार होने पर भी डेंगू टेस्ट किए और प्रति टेस्ट छह सौ से एक हजार रुपये तक वसूले। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने इन पर नकेल कसते हुए निर्देश दिए है कि एलाइजा टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होगी, जो कि सामान्य अस्पताल में होता है। प्राइवेट लैब में कार्ड से होने वाले टेस्ट मान्य नहीं है। साथ ही सभी प्राइवेट अस्पताल संचालकों और लैब संचालकों को निर्देश दिए गए है कि डेंगू संदिग्ध मरीज सामने आए तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दे। अपने स्तर पर किसी भी सूरत में डेंगू की पुष्टि न करें।
पिछले साल 601 डेंगू मरीज सामने आए थे। इस साल भी अब डेंगू संदिग्ध मरीज सामने आने लगे है। लोगों में डेंगू बीमारी का खौफ है। इस कारण पहले इसी का टेस्ट कराते है। पिछले वर्ष सामान्य अस्पताल में डेंगू टेस्ट लैब देरी से बनाये जाने और सैंपल जांच के लिए रोहतक पीजीआई भेजे जाने का प्राइवेट लैब संचालकों ने खूब फायदा उठाया। हजारों मरीजों के डेंगू के कार्ड टेस्ट किए गए और मनमाफिक वसूली की गई।प्र देशभर में ही यह हाल था।
स्वास्थ्य विभाग ने इस बार प्राइवेट लैब संचालकों से मरीजों को बचाने के लिए लैब संचालकों पर ही शिकंजा कसा। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए है कि कार्ड टेस्ट की रिपोर्ट मान्य नहीं होगी। एलाइजा टेस्ट ही सही और बेहतर परिणाम वाला है।
छह सौ रुपये से ज्यादा एलाजइजा टेस्ट के लिए या पुष्टि की तो होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने सभी लैब संचालकों व प्राइवेट अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए है कि वे डेंगू जांच के लिए एलाइजा टेस्ट कर सकते है। उससे स्वास्थ्य विभाग को कोई आपत्ति नहीं मगर निर्धारित छह सौ रुपये शुल्क पर ही। इससे ज्यादा चार्ज लिए तो कार्रवाई होगी। इसी तरह सभी को निर्देश दिए है कि डेंगू की पुष्टि किसी भी सूरत में न करे बल्कि स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें। सिविल सर्जन ही आधिकारिक तौर पर डेंगू की पुष्टि के लिए अधिकृत है। अगर किसी ने रिपोर्ट में पुष्टि की तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पिछले दफा प्राइवेट लैब संचालकों ने डेंगू टेस्ट के नाम पर काफी मरीजों को खूब लूटा। इस बार मरीजों को न लूट सके इसके लिए प्लानिंग बनाई गई और सभी लैब संचालकों, प्राइवेट अस्पताल संचालकों को इस बारे में निर्देश दिए गए है। डेंगू की पुष्टि सिर्फ सिविल सर्जन ही कर सकते है।
यतिन गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग