बेटियां पारिवारिक दायित्व और रीति रिवाज निभाने में भी आगे आ रही हैं। ऐसा ही एक मामला यहां भारत नगर निवासी देवेन्द्र चौहान की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के समय देखने को मिला, जब उसकी 13 साल की बेटी हर्षिता ने अपने दिवंगत पिता को मुखाग्रि देने की पहल की।
भिवानी कोर्ट में क्लर्क देवेन्द्र चौहान का बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया था। देवेन्द्र को दो बेटियां हैं। अंतिम संस्कार के समय तो परिवारजन जब बात के विचार में लगे थे कि मुखाग्रि परिवार का कौन सदस्य देगा। इस पर देवेन्द्र की 13 वर्षीय बेटी हर्षिता डिम्पी ने अपने पिता को खुद मुखाग्रि देने की बात कही। हर्षिता ने कहा कि वह अपने पिता की बेटी ही नहीं, बेटा भी हूं। उसके दादा बीएसएफ के रिटायर्ड डिप्टी कमांडर भवानी सिंह ने हर्षिता की बात का समर्थन किया। हर्षिता ने हांसी रोड स्थित रामबाग में अपनी चिता को मुखाग्रि दी। अंत्येष्टि में बीएसएफ के रिटायर्ड डीआईजी सतप्रकाश सिंह तंवर, हाईकोर्ट के जज राजमोहन, फरीदाबाद के जज यशवीर राठौड़, ठाकुर विक्रम सिंह, रोडवेज यूनियन के उपाध्यक्ष नरेन्द्र प्रधान आदि शामिल हुए।