प्रदेश सरकार ने लावारिस पशुओं की व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले को 50 लाख रुपये देने की घोषणा की है। भिवानी पशुपालन विभाग के पास 15 लाख की पहली किस्त आ चुकी है मगर गोशाला संचालक अपने पास और लावारिस पशु रखने को तैयार नहीं।
प्रदेश सरकार की ओर से 15 लाख की ग्रांट आने के बाद एडीसी की अध्यक्षता में इसी सप्ताह गोशाला संचालकों की बैठक हुई। बैठक में पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. जय सिंह, डीडीपीओ व अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में गोशाला संचालकों को बताया गया कि 15 लाख की ग्रांट सरकार की ओर से मिली है। जिसे गोशाला में शेड ठीक कराने, पानी की टंकी ठीक कराने व अन्य व्यवस्थाओं के लिए जरूरत अनुसार दी जाएगी। मगर विभाग ग्रांट उन्हीं गोशाला संचालकों को देगा जो और लावारिस पशु रखेगा। मगर अधिकतर का कहना था कि उनके पास पहले ही क्षमता से अधिक लावारिस पशु है।
नई गोचर भूमि की तलाश
गोशाला संचालकों के और लावारिस पशु रखने से इंकार के बाद अब पशुपालन विभाग और जिला विकास एवं पंचायत विभाग ने लावारिस पशुओं की व्यवस्था के लिए गोचर भूमि की तलाश शुरू कर दी है। विभाग अधिकारियों का मानना है कि गोचर भूमि मिलने के बाद 50 लाख से वहां लावारिस पशुओं के लिए व्यवस्था बनाई जा सकती है।
गोशालाओं की स्थिति
गौशाला क्षमता मौजूद लावारिस पशु
महम गेट गौशाला 3800 4500
पतरामगेट सुनारोंकी गौशाला 1500 2200
हालुवास गेट गौशाला 500 800
:
सरकार ने लावारिस पशुओं की व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की है। 15 लाख की ग्रांट आई है। जो गोशाला संचालक और लावारिस पशु रखने को तैयार हो, उसे टीन शेड ठीक कराने, पानी की टंकियां या अन्य व्यवस्थाओं के लिए जरूरत अनुसार राशि दी जाएगी। राशि अतिरिक्त उपायुक्त की अनुमति से दी जाएगी।
डा. जय सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पशु पालन विभाग