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भिवानी को बजट गिफ्ट में मिले मेडिकल कॉलेज और फोर लेन हाईवे

Tue, 22 Mar 2016 12:57 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला
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बजट - फोटो : demo pic
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राज्य आम बजट में कोई नया कर नहीं लगने से सुकून मिला तो महंगाई से राहत न मिलने की वजह से आम आदमी को निराश हुई। सुकून-कसक के बीच वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भिवानी को बजट गिफ्ट में मेडिकल कॉलेज व फोन लेन नेशनल हाई-वे दिया। दैनिक उपयोग की वस्तुओं में छूट की आस लगाने वालों की बजट में नहीं सुनी गई।
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सोमवार को पेश किए गए राज्य के बजट में भिवानी के मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी दी। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2014 से लटक रहा था। कैप्टन अभिमन्यु की बजट में घोषणा के बाद अब इस प्रोजेक्ट के सभी किंतु-परंतु दूर हो गए। मेडिकल कॉलेज शहर का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट इलाके की मेडिकल सुविधा और मेडिकल शिक्षा के लिए काफी अहम है। दूसरा तोहफा हिसार से तोशाम-बाढड़ा-सतनाली-महेंद्रगढ़-कनीना होते हुए रेवाड़ी तक 175 किलोमीटर के नए राष्ट्रीय राजमार्ग की घोषणा के रूप में मिला। हालांकि, इस मार्ग की घोषणा कुछ दिन पहले हो चुकी है, लेकिन नई बात यह है कि यह मार्ग फोर लेन होगा। इस मार्ग के बनने से राजस्थान व गुजरात की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। व्यापार की संभावनाओं में इजाफा होगा। तोशाम इलाके में डाडम पहाड़ी में खनन कार्य आरंभ हो चुका है। वहीं खानक  में भी जल्दी ही खनन कार्य शुरू होने जा रहा है। खानक के पत्थर का उपयोग  सड़क, रेलवे, मेट्रो में किया जाता रहा है। यहां का पत्थर पंजाब, राजस्थान,  दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश ले जाया जाता है। फोर लेन की सड़क इलाके को मिलने से प्रदेश की राजधानी के अलावा जयपुर,  मुंबई के रास्ते भी सुगम हो जाएंगे। इस तरह यह मार्ग तोशाम, कैरू, जूई,  बाढड़ा, सतनाली, महेंद्रगढ़, कनीना, रेवाड़ी के विकास के लिए मिल का पत्थर  साबित हो सकता है। 

व्यापारी खुश, आम आदमी की कसक बाकी
हरियाणा का आम बजट देखने के लिए लोग टीवी से चिपके रहे। किसी को टैक्स  में छूट की आस थी तो कोई चिंतित था कि सरकार महंगाई बढ़ाने के लिए कोई कदम न  उठा दे। तमाम अटकलों के बीच प्रस्तुत बजट को लोगों ने औसतन बताया। नया कर  नहीं लगने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली तो खाद्य पदार्थों, रसोई गैस  आदि में राहत की उम्मीद लगाए लोगों ने निराशा जताई।
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कोई नया कर नहीं लगाना अच्छा फैसला है मगर महंगाई कम करने के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए। खासकर दैनिक प्रयोग की वस्तुओं, खाद्य पदार्थों से कर कम किया जाता तो बेहतर होता।
मनोज कुमार, दुकानदार


महंगाई कम करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। छोटे किसानों के लिए तो कुछ भी नहीं है। फसली बीमा योजना के तहत जो बजट का प्रावधान किया है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। किसानों को जरूरत करीब 2600 से 2700 रुपये की और सरकार घोषणा कर तीन सौ करोड़ की। ओलावृष्टि से किसान बर्बाद हो गए है मगर सरकार ने बजट में ओलावृष्टि से प्रदेशभर में बर्बाद हुई फसल के मुआवजे के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किया।
मा. शेर सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा

सरकार ने नया कर नहीं लगाया। बजट में किसानों के लिए अच्छा प्रावधान किया मगर छोटे दुकानदारों, इलेक्ट्रोनिक आइटम पर लगे कर को भी कम किया जाता तो बेहतर होता। महंगाई कम करने के लिए जो प्रयास किए है वह नाकाफी है।
दीपक जावा, इलेक्ट्रोनिक दुकानदार

भाजपा को भाया, विपक्ष ने नकारा
अपनी सरकार के बजट की तारीफ में भाजपा ने कशीदे पढ़े तो विपक्ष को बजट रास नहीं आया। भाजपा का कहना है कि उनकी सरकार ने जनहितैषी बजट दिया है। प्रदेश के जनस्वास्थ्य मंत्री घनश्याम सर्राफ ने कहा कि हरियाणा के बजट में किसान, शिक्षा, स्वास्थ्य हर चीज का ख्याल रखा है। हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया गया है। बजट में खल बिनौला, बेसन, सूती धागा आदि को टैक्स फ्री कर महंगाई पर नियंत्रण का प्रयास किया हैं। इन पर टैक्स हटने से व्यापारी, किसान व पशुपालकों को फायदा मिलेगा। वहीं पांच नए कालेज खुलने से प्रदेश में शिक्षा का स्तर और ऊंचा उठेगा। उधर, भाजपा के सभी मोर्चों व प्रकोष्ठों के प्रदेश  प्रभारी ऋषिप्रकाश  शर्मा, जिला अध्यक्ष ताराचंद अग्रवाल व प्रदेश सह मीडिया  प्रमुख रीतिक  वधवा व जिला महासचिव शंकर धूपड़ ने कहा कि इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले  28.4 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने बिजली  निगमों के घाटे को अपने ऊपर ले लिया  है। इससे अब बिजली क्षेत्र में सुधार  होगा तथा प्रदेश के लोगों को  पर्याप्त मात्रा में बिजली मिल सकेगी। 

निराशाजनक व दिशाहीन बजट
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि प्रदेश में मनोहर लाल खट्टर सरकार का दूसरा बजट भी जनविरोधी, निराशाजनक व दिशाहीन है। बजट में सिर्फ आंकड़े और कभी पूरे न होने वाले दावे किए गए हैं। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के बहाने पिछले दो बजट से जनता का गला घोटा जा रहा है। बजट में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के शिकार दुकानदारों व प्रतिष्ठानों की क्षतिपूर्ति के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है। बजट में व्यापारी कल्याण कोष की घोषणा की उम्मीद थी, मगर अधूरी रह गई। 
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