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नई वार्डबंदी में शहर से बाहर होंगी आधा दर्जन कॉलोनी

Mon, 21 Mar 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला
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आधा दर्जन कॉलोनी - फोटो : अमर उजाला
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पिछले 10-12 वर्षों तक शहर का हिस्सा रही आधा दर्जन कॉलोनी शहर से बाहर होंगी। यह हम नहीं कह रहे, नई वार्डबंदी की संशोधित सर्वे रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है। सिटी स्टेशन लाइन पार कॉलोनी, पिपलीवाली जोहड़ी लाइन पार की कॉलोनी अब शहरी सीमा में नहीं रहेगी। इस निर्णय से करीब साढ़े छह हजार लोग नगर परिषद चुनाव के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। एक और हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद ने जिला नगर योजनाकार के 1976 के शहरी सीमा के मैप को आधार मान कर वार्डबंदी कराई है। नप के नए सर्वे रिपोर्ट को अब मुख्यालय भेजा जाएगा और करीब ढाई महीने पहले हुए वार्डबंदी सर्वे में संशोधन किया जाएगा।
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करीब तीन महीने पहले हुई नई वार्डबंदी पर एतराजों की बौछार के बाद नगर परिषद ने कुछ संशोधन किए हैं। संशोधन में सबसे हैरानी करने वाली बात यह है कि 1976 की शहरी सीमा को आधार माना गया है। यानी, 30 साल के बाद शहरी सीमा में शामिल हुई कॉलोनी आउट होंगी। सिटी स्टेशन लाइन पार की दो कॉलोनियां, कौंट रोड की एक-दो कॉलोनियों और  पीपली वाली जोहड़ी लाइन पार की कॉलोनी को शहर सीमा में दर्शाया गया है। बता दें कि ऐसी आधा दर्जन कॉलोनी के लोग परिषद के विगत दो चुनावों में मतदान भी कर चुके हैं। नप की सर्वे रिपोर्ट के बाद अब पिछले दिनों हुई वार्डबंदी की जनसंख्या में से 67 सौ घटाई जाएंगी।

दो लाख आठ हजार से दो लाख एक हजार हुई जनसंख्या
एजेंसी के सर्वे में दो लाख आठ हजार जनसंख्या दिखाई गई थी। नप की ओर से कुछ कॉलोनियों को शहरी सीमा से बाहर कर करवाये सर्वे में दो लाख एक हजार 300 जनसंख्या रह गई है। यानी 67 सौ कम हुए। अब 67 सौ कम कर वार्डों की जनसंख्या निर्धारित की जाएगी। यानी छह हजार 493 औसतन एक वार्ड की जनसंख्या रहेगी। नियमानुसार 10 फीसदी तक कम-ज्यादा हो सकती है। सर्वे में शहरी सीमा से बाहर हुई कॉलोनियों का सीधा नुकसान उन कॉलोनियों मेें रहने वाले लोगों का होगा। वे न तो नगर परिषद चुनावों में मतदान कर पाएंगे और न ही नगर परिषद उन कॉलोनियों में कोई सुविधा उपलब्ध कराएगी। 
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देवनगर न गांव, न शहर
जिला जेल से आगे बसे देवनगर कॉलोनी। न शहरी सीमा में है और न ही ग्रामीण। न यहां के गांवों की या शहर की सरकार बनाने में सहयोग कर पा रहे है। पिछले नगर परिषद चुनाव से पहले भी इसे शहरी सीमा में शामिल करने की बात उठी मगर नहीं किया। कॉलोनी वासी पंचायत बनाने का प्रस्ताव सरकार के पास लेकर गए मगर वह भी मंजूर नहीं किया गया। अब देव नगर न शहर का हिस्सा है और न ही गांव का।

जिला नगर योजनाकार विभाग के मैप के अनुसार शहर की वार्डबंदी करवाई गई है। 1976 के बाद से शहर की सीमा नहीं बढ़ी है। हो सकता है कि पिछली वार्डबंदी में कुछ कॉलोनियों को गलती से शामिल किया गया है। जो इस बार बाहर हो गई है। अब 6700 जनसंख्या कम हुई है। इसी के अनुसार वार्डों की जनसंख्या तय की जाएगी। अब करीब दो लाख एक हजार तीन सौ की जनसंख्या के आधार पर वार्डों की जनसंख्या तय होगी।
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संजय यादव, सचिव, नगर परिषद
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