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ब्लड बैंक में खून की कमी

Sat, 07 Jan 2017 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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blood - फोटो : amar ujala
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भिवानी के ब्लड बैंक में वीरवार को एक साथ दो मरीजों के लिए एबी निगेटिव ब्लड की जरूरत पड़ी, लेकिन केवल एक यूनिट उपलब्ध थी। सामान्य अस्पताल में भर्ती मरीज को परिजन कहीं और ले गए, इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीज को रक्त उपलब्ध कराया। अब सामान्य अस्पताल में एबी निगेटिव ब्लड खत्म है और जरूरत पड़ी तो रेडक्रास के सदस्यों को फोन करके ही बुलाना पड़ेगा।
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रेयर (दुर्लभ) माने जाने वाले निगेटिव ग्रुप के ब्लड की कमी स्वास्थ्य विभाग के लिए भी परेशानी का सबब बनी है। ऐसे ही रेयर ब्लड ग्रुप एबी निगेटिव के लिए वीरवार को समस्या बनी। सामान्य अस्पताल में भर्ती के मरीज का सिजेरियन करने के लिए समय दिया गया और उसे एबी निगेटिव ब्लड चाहिए था। इसी दौरान एक प्राइवेट अस्पताल से भी इस ब्लड ग्रुप की डिमांड आई जबकि ब्लड बैंक में एक ही यूनिट था। अस्पताल प्रशासन ने पहले सरकारी अस्पताल में उपचाराधीन मरीज को देने का निर्णय लिया, मगर जब वार्ड में जाकर देखा तो उक्त मरीज को उसके परिजन कहीं और ले जा चुके थे। जिसके निजी अस्पताल की जरूरत को पूरा किया गया। अब अस्पताल के ब्लड बैंक में एबी निगेटिव रक्त बिल्कुल खत्म है। इस ग्रुप के लिए फिलहाल विभाग के अधिकारी पूरी तरह रेडक्रास के रक्तदाताओं पर निर्भर है कि जरूरत पड़ने पर इस ग्रुप के किसी रक्तदाता को ढूंढा जाए और उसे बुलाया जाए।

दूसरे ग्रुप के रक्त की भी कमी
अन्य निगेटिव ग्रुप बी निगेटिव, ओ निगेटिव की भी दो से चार यूनिट ही है। ए निगेटिव की हालांकि आठ यूनिट हैं। ए पॉजिटिव, बी पॉजिटिव, एबी पॉजिटिव, ओ-पॉजिटिव ग्रुप का रक्त पर्याप्त मात्रा में है।
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नियमित रक्तदाताओं की वेबसाइड अपडेट नहीं
करीब तीन साल पहले ब्लड बैंक को ऑन लाइन करने के लिए वेबसाइट बनाई गई थी। इसका उद्देश्य सभी रक्तदाताओं का रिकार्ड ऑन लाइन व अपडेट करना था ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें रक्तदान के लिए बुलाया जा सके। इसके अलावा प्रदेशभर के किस जिले के ब्लड बैंक में कितना ब्लड है, इसकी जानकारी भी वेबसाइट पर ही उपलब्ध करवानी थी। वेबसाइट तो बनी मगर इसे न अपडेट किया और न ही अन्य कोई जानकारी इस पर दी गई। जिस कारण यह बेहतर स्कीम दम तोड़ चुकी है। अब विभाग ब्लड की कमी पर पूरी तरह रेडक्रॉस सदस्यों या अन्य समाजसेवी संस्थाओं के भरोसे है।

सालभर में चढ़ा 4500 यूनिट ब्लड, 75 फीसदी महिलाओं को
वर्ष 2016 में सामान्य अस्पताल के ब्लड बैंक से 4500 से अधिक यूनिट रक्त लोगों को चढ़ाकर उनकी जिंदगी बचाई गई। मगर इनमें 75 फीसदी तक रक्त गर्भवती महिलाओं को चढ़ाया गया। दरअसल गर्भवती महिलाओं में खून की कमी के केस बहुत ज्यादा आ रहे हैं। सिजेरियन केसों में भी रक्त की जरूरत पड़ रही है। बाकी 25 फीसदी रक्त सड़क हादसों में घायल, विभिन्न अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों व ऑपरेशन के लिए चढ़ाया गया।

निगेटिव ग्रुप बहुत कम मिलता है। बृहस्पतिवार को दो मरीजों को एबी निगेटिव ब्लड की जरूरत थी मगर एक को ही दिया जा सका। दूसरे मरीज को परिजन कहीं और ले गए। कैंप में भी रेयर ग्रुप वाले रक्तदाताओं की तलाश रहती है और अलग से लिया जाता है। फिलहाल तो रेडक्रॉस के पास रक्तदाताओं की लिस्ट है। जिसमें रेयर ब्लड की जरूरत पड़ने पर फोन कर रक्तदाता को बुलाया जा सकता है।
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