भिवानी। महिलाओं ने हाथों में जागृति की मशाल थामी तो संस्कृति से भी जीवन का जुड़ाव हुआ और परंपरागत खान-पान एवं तीज त्योहारों से नई पीढ़ी में नई उम्मीदें जगीं। पिछले दस सालों से महिला जागृति कल्याण समिति ग्रामीण और शहरी अंचल की महिलाओं के बीच भारतीय संस्कृति के तीज त्योहारों में परंपरागत खान-पान और गीतों का ज्ञान बांट रहीं हैं।
महिला कल्याण जागृति समिति की प्रधान राजेश देवी राजपूत ने बताया कि युवा पीढ़ी भारतीय त्योहारों में रुचि तो दिखाती हैं, मगर उन्हें मनाने के तौर तरीके बदल गए हैं। समिति की महिलाओं ने त्योहारों की खुशियां एक-दूसरे के साथ साझा करने और इन्हें सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया। जिसमें दादी-पोती, सास-बहू के साथ चाची-ताई को भी शामिल किया है। बुजुर्ग महिलाएं परिवार की महिलाओं को परंपरागत गीतों के बोल और उनके गायन का अभ्यास कराती हैं। वहीं, परंपरागत पकवान बनाने की भी एक दूसरे के बीच प्रतिस्पर्धाएं भी कराती हैं। अब तक संगठन कई गांवों व शहर के वार्डों में पकवान बनाओ, परंपरा निभाओ की प्रतियोगिताएं करा चुकी हैं। जिसमें विजेता महिला को उसकी की नजदीकी रिश्तेदार ही सम्मानित करती है। वीना बताती हैं कि समिति के प्रयास से गांव बापोड़ा, देवसर, दिनोद, तिगड़ाना, जाटूलुहारी, कलिंगा, प्रेमनगर, बवानीखेड़ा की महिलाओं में नई जागृति आई है।
सखी री सामण आया, चाल्या गैं झूलण नै...
राजेश देवी बताती हैं कि सखी री सामण आया, चाल्या गैं झूलण नै....। सामण की बरस रही फुहार, आया तीज का त्योहार। ये गीत परंपरागत पसंदा लोक गीत हैं, जो सदियों से चले आ रहे हैं।
समिति महिलाओं को त्योहारों के परंपरागत गीतों का अभ्यास कराती हैं, ताकि भविष्य में उन्हें आगे बढ़ाया जा सके। संगठन से जिले भर में करीब डेढ़ सौ महिलाएं भी जुड़ी हैं।
-राजेश देवी राजपूत, प्रधान महिला जागृति कल्याण संगठन भिवानी।
तीज त्योहार परंपराओं के साथ ठैठ हरियाणवी व भारतीय खान-पान से भी जुड़े हैं। सावन में घरों के अंदर घेवर, सुहाली, गुलगुले, पूरी, कचौरी, मट्ठी घर में ही तैयार की जाती हैं।
-वीना देवी, सचिव, महिला जागृति कल्याण संगठन।
गांव के जोहड़ के पास खाली जगह पर पेड़ों पर झूले दूर से ही तीज के आगाज का अहसास करा देते हैं। ग्रामीण अंचल में आज भी त्योहार को उसी तरीके से मनाए जाने का प्रयास महिलाएं करती हैं।
-रीमा देवी, सदस्य, महिला जागृति कल्याण संगठन।
हमारे त्योहार संयुक्त परिवार और एक दूसरे के प्रति प्यार को बढ़ाने के लिए ही बने हैं। जिससे पड़ोसी के साथ-साथ चाचा-ताई और भाई-बहनों के बीच का प्यार और अधिक बढ़ जाता है।
-रेनु देवी, सदस्य महिला जागृति कल्याण संगठन।