गांव बामला में आग ने पांच किसानों की मेहनत खाक में मिला दी। शनिवार दोपहर एकाएक लगी आग में गेहूं व गन्ने की फसल जलकर राख हो गई। करीब सात एकड़ में खड़ी गन्ने व साढ़े छह एकड़ में गेेहूं की फसल राख हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि गन्नों से लदी ट्राली को नहीं बचाया जा सका। खेतों में काम रहे ग्रामीणों व मजदूरों ने ट्यूबवेल व टैैंकर के पानी से आग पर काबू पाया। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची।
गांव बामला के रेलवे स्टेशन के समीप खेतों में शनिवार दोपहर पौने एक बजे अचानक आग भड़क उठी। हवाओं के तेज झोके से आग ने और प्रचंड रूप ले लिया और आग ने पक कर खड़ी गेहूं व ईख की फसल को अपने आगोश में ले लिया। ईंख की फसल से शुरू हुई आग ने सात एकड़ ईंख व साढ़े छह एकड़ की गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया। पास के खेतों में फसल की कटाई कर रहे मजदूरों व ग्रामीणों ने तुरंत टैंकरों व ट्यूबवेल के पानी डालकर आग पर काबू पाया। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने आग को पूरी तरह से शांत कर दिया। ग्रामीण नरेश, बलवान, करतार आदि ने बताया कि सभी खेतों में काम पर लगे हुए थे। ग्रामीणों ने टैंकर, पानी सप्लाई की गाड़ियों के पानी से आग पर काबू पाया और खेतों में कटी हुई गेहूं की पूलियों को उठाकर दूर फेंका। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की।
गन्ने से लदी खड़ी ट्रैक्टर-ट्राली में लगी आग
हवाओं के झोखे से बार बार रूख बदलती आग ने ईंख से लदी खड़ी टै्रक्टर-ट्राली को भी अपनी चपेट में ले लिया।
ट्राली के टायर में आग लगने से बिगड़े असंतुलन के कारण ट्राली पलट गई व उसमें भरी हुई फसल में आग लग गई। हालांकि समय रहते ग्रामीण किसी तरह ट्रैक्टर को अलग कर दूर ले जाने में कामयाब रहे। आग लगने से सुरेश की तीन एकड़ गेहूं, रामफल की डेढ़ एकड़ गेहूं, सतेंद्र की एक एकड़ गेहूं व एक एकड़ ईंख, जलजीत की एक एकड़ गेहूं व एक एकड़ ईंख और साधूराम की पांच एकड़ ईंख
जलकर राख हो गई।