भिवानी। शहर की हवा शुक्रवार को देश में सबसे अधिक प्रदूषित दर्ज की गई। सुबह 11 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 455 तक पहुंच गया, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है और उस समय यह देश में सबसे ऊंचा स्तर रहा। शाम चार बजे भी एक्यूआई 406 दर्ज किया गया। यानी पूरा दिन भिवानी की हवा खतरनाक श्रेणी में बनी रही। आसमान में स्मॉग की मोटी परत छाई रही जिससे दृश्यता प्रभावित हुई। मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिन राहत की कोई संभावना नहीं जताई है। तीन नवंबर को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा जो असरदार रहा तो कुछ राहत संभव है।
सुबह जब लोग टहलने और बच्चों को स्कूल छोड़ने निकले तो शहर स्मॉग की चादर में लिपटा नजर आया। लोगों को लगा बादल छाए हैं लेकिन कुछ देर में ही आंखों और नाक में जलन तथा गले में खराश महसूस हुई। कई लोगों ने रुमाल, साफा और हाथ से मुंह-नाक ढककर राहत पाने की कोशिश की। मास्क न पहनने वालों को खासा परेशानी उठानी पड़ी। वेबसाइट एक्यूआई डॉट इन के अनुसार सुबह पांच बजे एक्यूआई 401 था जो बढ़ते-बढ़ते 11 बजे 455 पर पहुंच गया। दोपहर में हल्की हवा चलने से सूचकांक में मामूली गिरावट आई लेकिन आंकड़ा 400 से नीचे नहीं उतरा। सांझ ढलते ही दृश्यता घट गई और लोगों को वाहनों की हेडलाइटें जलाकर चलना पड़ा।
दिन भर ये रहा एक्यूआई का स्तर
समय – एक्यूआई
सुबह 5 बजे – 401
सुबह 7 बजे – 407
सुबह 8 बजे – 414
सुबह 9 बजे – 425
सुबह 10 बजे – 436
सुबह 11 बजे – 455
दोपहर 12 बजे – 404
दोपहर 1 बजे – 431
दोपहर 2 बजे – 427
दोपहर 3 बजे – 413
शाम 4 बजे – 406
शाम 5 बजे – 386
शाम 6 बजे – 366
(स्रोत– एक्यूआई डॉट इन वेबसाइट)
ऐसे बनता है स्मॉग
कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी के मौसम विशेषज्ञ डॉ. देवीलाल ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ी है। नमी के कारण वातावरण में मौजूद धूल, धुआं और मिट्टी के कण ऊपर नहीं जा पाते और नमी के साथ मिलकर स्मॉग की परत बना लेते हैं। अब हवा चलने या बारिश होने पर ही इससे राहत मिल सकती है। तीन नवंबर को सक्रिय होने वाला नया पश्चिमी विक्षोभ असरदार रहा तो स्मॉग से कुछ राहत मिलेगी।
आंख, नाक, गला व सांस के मरीजों की बढ़ी संख्या
एक्यूआई बढ़ने से आंख, नाक, गला और सांस संबंधी रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 250 से 300 मरीज पहुंचे जिनमें आंखों में जलन, पानी आना और धुंधला दिखाई देने की शिकायत थी। वहीं सामान्य रोग विभाग में भी कई मरीज खांसी, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं के साथ पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि इन समस्याओं की मुख्य वजह हवा में बढ़ता प्रदूषण है।
ये बरतें सावधानी
सुबह और शाम पार्कों, खुले मैदानों व सड़कों पर सैर न करें।
घर पर रहकर हल्का व्यायाम करें।
घर से बाहर जाएं तो एन-95 मास्क पहनें।
जरूरत न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें।
बुजुर्गों और बच्चों को खुले में न जाने दें।
आंख या सांस में जलन होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
बाहर से लौटने के बाद आंख और नाक को अच्छी तरह साफ करें।
पानी का छिड़काव करने वाली गाड़ियां नदारद
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए शहर में एंटी-स्मॉग मशीनों से नियमित पानी छिड़काव की आवश्यकता है। लेकिन अभी तक न तो जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सड़कों पर उड़ रही धूल को रोकने के लिए पानी की बौछार वाली गाड़ियों से छिड़काव कराया जा रहा है। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही से उठ रही धूल हवा में मिलकर सांस लेने में परेशानी बढ़ा रही है।
हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से श्वास रोगियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। प्रदूषण का स्तर सामान्य होने तक सुबह और शाम की सैर से बचें और घर से बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क अवश्य पहनें। आंखों में जलन होने पर चिकित्सक से सलाह लें। अपने आसपास धूल-मिट्टी न उड़े, इसके लिए पानी का छिड़काव करें और प्रशासन की हिदायतों का पालन करते हुए खुद को सुरक्षित रखें। -डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।