प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से लिए गए प्रीमियम की समय पर अदायगी को लेकर बैंक व बीमा कंपनी के बीच बने विवाद के बीच किसानों को बड़ी राहत मिली है। बहल खंड के 223 किसानों में से 209 के दावे को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी ने किसानों को करीब एक करोड़ 16 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। इस क्लेम के लिए किसानों को प्रशासन से लेकर न्यायालय तक करीब चार साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी।
किसानों की ओर से किए गए केस की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होनी है। मामला वर्ष 2017 का है। बहल क्षेत्र के जिन 223 किसानों ने बहल के इलाहाबाद बैंक (अब इंडियन बैंक) में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2017 की खरीफ फसल के लिए अपने खाते से प्रीमियम कटवाया था, उन किसानों की फसल बर्बाद होने पर उनको बीमा क्लेम जारी नहीं किया गया।
किसानों ने इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि बैंक ने जो किसानों से प्रीमियम लिया था वो निर्धारित समय पर बीमा कंपनी को नहीं दिया गया। इस वजह से उनका बीमा क्लेम नहीं बन सकता है। किसानों ने कहा कि अगर बैंक ने कंपनी को पैसा नहीं दिया तो उनका इसमें क्या कसूर है। उनको क्लेम बैंक दें या कंपनी। उनकी बर्बाद हुई फसल का क्लेम लेने के किसान हकदार हैं।
चार साल में प्रशासन से लेकर न्यायालय तक गए किसान
किसानों के साथ हुई इस नाइंसाफी को लेकर किसान यूनियनों ने भी पूरा साथ दिया। किसानों ने अखिल भारतीय किसान सभा के बैनरतले वर्ष 2018 में जिला उपायुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखा। इस पर उपायुक्त ने पत्र क्रमांक 7009 दिनांक 30 जुलाई 2019 में व महानिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा राज्य शिकायत निवारण समिति ने पत्र दिनांक दो जुलाई 2019 के तहत प्रदेशभर के 2734 किसानों के साथ इलाहाबाद बैंक बहल के 223 किसानों के दावे को सही माना। कंपनी को बीमा क्लेम दिए जाने को कहा। वहीं, बीमा कंपनी ने दोनों ही अधिकार प्राप्त समितियों के फैसले को दरकिनार करते हुए किसानों को भुगतान नहीं किया।
वर्ष 2019 में किसानों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव डॉ. बलबीर सिंह ठाकन ने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर दिए आदेशों को नहीं मानने पर किसान सभा ने अदालती लड़ाई लड़ने का मन बनाया। किसान सोमबीर गरवा के मार्फत किसानों ने वर्ष 2019 में अदालत का रुख किया। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवीर विरुद्ध हरियाणा सरकार व अन्य के खिलाफ नवंबर 2019 में याचिका दायर की। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की हरियाणा राज्य स्तरीय कमेटी ने दिनांक 14 जनवरी 2021 को हरियाणा के 16,126 किसानों के लंबित बीमा क्लेम का फैसला किसानों के हक में किया। अधिकतर मामलों में न तो बैंकों ने इसे माना और न ही बीमा कंपनियों ने।
चार सालों में अदालत में जवाब देने से बचती रही कंपनी
किसानों के इस मामले में बीमा कंपनी आखिर तक अपनी बात पर अडिग रही और किसानों को क्लेम देने से बचती रही। कंपनी ने पिछले चार साल में अदालती सुनवाई में जवाब देने की जगह दावे की तारीख पर तारीख लेती रही। लिहाजा, मामला लंबा खींचता चला गया। किसानों ने हर बार अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा। अब इस मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होनी है। इससे पहले ही बीमा कंपनी ने बहल के इलाहाबाद बैंक के 209 किसानों को खरीफ 2017 फसल के बीमा क्लेम के 1,16,09,234 रुपये जारी कर दिए हैं। क्लेम पाने में जो चार किसान बाकी वंचित रहे हैं, उनका कुछ तकनीकी कारणों से जारी नहीं हो पाया है।
यह किसानों के हक की जीत हुई है। बैंक ने प्रीमियम काटा और कंपनी तक समय पर नहीं पहुंचा तो इसमें किसान का कोई कसूर नहीं था। किसानों ने शासन, प्रशासन से लेकर अदालत तक इस लड़ाई को लड़ा। खुशी की बात यह है कि अदालत का फैसला आने से पहले ही कंपनी ने किसानों को क्लेम राशि जारी कर दी है। अब 18 दिसंबर 2023 को केस की तारीख पर बीमा कंपनी किसानों को पैसे देने की बात कहेगी। हम किसान सभा की तरफ से चार साल तक जो क्लेम राशि किसानों को नहीं मिली थी, उस पर 12 प्रतिशत ब्याज की मांग करेंगे।
- डॉ. बलबीर सिंह ठाकन, संयुक्त सचिव, अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा।