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कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दुकान से हटवाया अवैध कब्जा

Fri, 02 Jun 2017 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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दुकान का ताला तोड़ता पुलसि का कार‌िंदा।
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र्राफा बाजार में कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने एक दुकान से अवैध कब्जा हटवाया। ताला तोड़कर दुकान का दरवाजा खोला गया।
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इस दौरान दुकानदार के परिजनों ने रोष भी जताया। करीब तीन घंटे तक मार्केट में हंगामे की स्थिति रही और लोगों की भीड़ लगी रही।
सर्राफा बाजार में जानकीदास सागर मल नामक दुकान से पुलिस ने कोर्ट के निर्देश के बाद अवैध कब्जा हटवाया। पुलिस टीम सुबह करीब 11 बजे मार्केट में पहुंची। यहां दुकान के ताले तुड़वाए गए और दोपहर करीब दो बजे तक दुकान को खाली करवाया जा सका। इस दौरान दुकानदार अनिल के परिवार ने इस तरह दुकान खाली कराए जाने का विरोध भी किया। मगर पुलिस ने किसी एक नहीं सुनी और कोर्ट के निर्देशानुसार दुकान को खाली करवाया।
दुकान मालिक हनुमान प्रसाद ने बताया कि उसने यह दुकान 1982 में पत्नी शांति देवी के नाम से खरीदी थी। पहले उसके पिता जी सागर मल दुकान को संभालते थे और अब वह स्वयं। बाद में वह परिवार समेत दिल्ली चला गया और वहां काम करने लगा। दुकान उसने अपने भाई के लड़के अनिल को किराये पर दे दी। वह 2008 में परिवार समेत दिल्ली से वापस भिवानी आया। यहां अपना परिवार चलाने के लिए अनिल को दुकान खाली करने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना। चार साल तक उसे समझाया जब नहीं माना तो आखिरकार 2012 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने जनवरी में दुकान खाली करने का फैसला दिया। इसके बावजूद भी दुकान खाली नहीं की। अपील की थी वह खारिज हो गई। कोर्ट ने अब सख्ती से दुकान खाली कराने के निर्देश दिए। जिसके बाद आज पुलिस ने दुकान खाली करवाई है। एसएचओ बिक्रम सिंह ने बताया कि दुकान पर कब्जे को लेकर पारिवारिक विवाद था। कोर्ट के निर्देश पर दुकान खाली करवाई गई है।
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पहले दुकानदार ने दिखाया गुस्सा, फिर एसएचओ ने दिखाया रोष
दुकान खाली करने में परिवार ढिलाई बरत रहा था। सामान निकालने के लिए मजदूर बुलाए गए तो दुकानदार भड़क गया और मजदूरों को भगा दिया। दुकान खाली करने में देरी करने पर एसएचओ को गुस्सा आ गया और उन्होंने दुकानदार को लताड़ा। जिसके बाद जल्दी-जल्दी सामान निकाला गया।
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छलके आंसू, अपशब्दों से निकाला गुबार
अनिल कुमार पिछले काफी वर्षों से यह सर्राफा दुकान चला रहा है। वीरवार को दुकान खाली करने की कार्रवाई हुई तो परिवार के सदस्यों की आंखे छलक आई। वहीं अपशब्दों से गुबार भी निकाला। बराबर की दुकान के बाहर कुर्सी पर बैठे दुकान मालिक हनुमान प्रसाद को परिवार के सदस्य दूर से अपशब्द कहते दिखे।
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