दर्द, ताकत और नशे के इंजेक्शन लगाकर म्हारे गबरू खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। यह स्थिति भीम स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक के पास झाड़ियों में फैली सिरिंज और इंजेक्शन की खाली शीशी बयां कर रही है। झाड़ियों में ही नहीं शौचालयों में भी प्रयोग की हुई सिरिंज और इंजेक्शन की खाली शीशियां पड़ी हैं। यहां भारी संख्या में सिरिंज बरामद हुई है। जिससे खेल विभाग में भी हड़कंप मचा है।
अब चर्चाएं ये हैं कि यहां अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों ने इनका प्रयोग किया है या फिर भीम स्टेडियम में पिछले दिनों हुई स्टेट लेवल की स्पर्धाओं में भाग लेने आए खिलाड़ियों ने। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं की तैयारियों में जुटे खिलाड़ियों पर भी डोपिंग टेस्ट में फंसने का भय सता रहा है। हालांकि खेल विभाग के अधिकारी किसी भी बड़े खिलाड़ी द्वारा इस तरह के इंजेक्शनों का इस्तेमाल किए जाने की बातें सिरे से नकार रहे हैं।
युवा खिलाड़ियों में स्टेमिना बढ़ाने के लिए ताकत, दर्द और नशे के इंजेक्शन लगाने का ट्रेंड बढ़ रहा है। भीम खेल स्टेडियम में सुबह और शाम करीब चार हजार खिलाड़ी खेल अभ्यास के लिए आते हैं। परिसर में 16 प्रकार के खेलों में खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भिवानी को नई पहचान दिलाने के लिए अभ्यास में जुटे हैं। खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए खेल विभाग द्वारा भी परिसर में 45 खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति की हुई है। मुक्केबाजी, कुश्ती और फुटबाल के साथ हॉकी के खिलाड़ियों की बदौलत भिवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। वर्तमान में सेना और पुलिस भर्ती की तैयारियों के लिए भी करीब 500 से 700 युवा भीम स्टेडियम में अभ्यास के लिए आते हैं।
समाजसेवी एवं हेल्थ एक्सपर्ट जसवंत पंघाल ने बताया कि खेल परिसर के बाथरूम व ड्रेसिंग रूम के आसपास काफी संख्या में इंजेक्ट किए हुए सिरिंज मिले हैं। इस्तेमाल किए हुए सिरिंज दिखाते हुए उन्होंने बताया कि खिलाड़ी इनका इस्तेमाल कर यहां फेंक रहे हैं। इससे उन्हें क्षणिक लाभ तो मिलेगा, मगर खिलाड़ी के व्यक्तित्व और शरीर पर इसका बुरा असर पड़ेगा, जिससे उसका खेल करियर भी चौपट हो सकता है।
इन दवाओं का कर रहे इस्तेमाल
आम तौर पर हरियाणा में कुछ दर्द निवारक दवाओं पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसमें फोर्टविन इंजेक्शन भी शामिल है। भीम स्टेडियम से पायरोक्सिकाम, मैफेनटर्माइन सलफेट इंजेक्शन, रिकंबीनेंट एरिथ्रोपोइटिन इंजेक्शन बरामद हुईं हैं।
मेरे संज्ञान में यह मामला अभी आया है। सभी खेल प्रशिक्षकों को पत्र जारी कर इस संबंध में सख्त हिदायतें दी जाएंगी। 27 फरवरी को खिलाड़ियों को नशे के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। कोई भी खिलाड़ी इस तरह के इंजेक्शनों का इस्तेमाल नहीं करता है। यहां पर प्राइवेट खेल स्पर्धाएं होती हैं और भर्ती के लिए भी युवा अभ्यास के लिए आते हैं। इसकी पड़ताल कराई जाएगी कि आखिर इंजेक्शन कहां से आए हैं और कौन इनका इस्तेमाल कर रहा है।
- अनिल चहल, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी भिवानी।