गांव बामला में पंचायत करते ग्रामीण।
भिवानी। गांव बामला में रविवार को आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने जननायक जनता पार्टी के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के उस बयान को झूठा करार दिया जिसमें उन्होंने भिवानी दौरे के दौरान कुछ संदिग्ध गाड़ियों द्वारा पीछा किए जाने और उनके बामला गांव की ओर भागने का दावा किया था। ग्रामीणों ने कहा कि किसी ने उनका पीछा नहीं किया और गांव की छवि खराब करने के लिए बिना तथ्य गांव का नाम लिया गया। पंचायत ने दिग्विजय चौटाला से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह विवाद हिसार में दुष्यंत चौटाला और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद सामने आया। जजपा ने इस घटना के विरोध में 27 अप्रैल को हिसार में महापंचायत बुलाई है। इसी महापंचायत का न्योता देने के लिए दिग्विजय चौटाला 23 अप्रैल को भिवानी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ गाड़ियां उनका पीछा कर रही थीं और वीडियो बनाए जाने पर बामला गांव की ओर भाग गईं।
पंचायत में सुधीर पहलवान और जिला पार्षद रूपेंद्र ग्रेवाल ने कहा कि दिग्विजय चौटाला के आरोपों के बाद गांव के सभी सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई लेकिन किसी भी वाहन द्वारा उनका पीछा किए जाने की पुष्टि नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसी कोई घटना हुई होती तो दिग्विजय गांववासियों को सूचित करते, जिससे उनकी मदद की जा सकती थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि दिग्विजय चौटाला अपने बयान वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो गांव उनका सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार करेगा तथा भविष्य में गांव में उनके प्रवेश और राजनीतिक कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि बामला गांव कमजोर नहीं है और गांव में आने वाले किसी भी व्यक्ति की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता है। पंचायत में बामला-1 सरपंच प्रतिनिधि सुरेश, बामला-2 सरपंच प्रतिनिधि अभिषेक उर्फ नेसी, बामला कमेटी प्रधान सुंदर ग्रेवाल, ग्रेवाल खाप प्रधान जगबीर ग्रेवाल, डॉ. मनफूल, बलबीर दूहन, बलवान सूबेदार, सुक्रम पाल ठेकेदार और बलबीर पूनिया सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।