05 फोटो अनाजमंडी में शेड के नीचे रखे हजारों बाजरे के कट्टे।
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भले ही सरकार ने किसानों को खुश करने के लिए बाजरे के दाने-दाने की खरीद सुनिश्चित कर दी, मगर सरकार के भंडारण को लेकर पुख्ता प्रबंध नहीं होने की वजह से गोदामों में बाजरे को जगह भी नसीब नहीं हुई है। आलम यह है कि भिवानी अनाज मंडी में करीबन चार हजार मीट्रिक टन यानी 80 हजार बाजरे के कट्टे खुले शेड के नीचे रखे हुए हैं। जबकि पिछले दो दिनों से दो सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद किया गया बाजरा भी अनाम मंडी में खुले शेड के नीचे ही रखा जा रहा है।
हालांकि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने खुले में शेड के नीचे रखे इस बाजरे के प्रभावित होने से पहले ही इसे सभी डिपो पर नवंबर माह की सप्लाई में भेजे जाने का प्लान भी बनाया है। जिसका रिलीज ऑर्डर भी जारी हो चुका है। बस अब जल्द से जल्द उठान होना बाकी है। मगर फिर भी मौसम में आ रहे बदलाव और गोदामों में जगह नहीं मिलने की वजह से बाजरे के खराब होने का संकट भी मंडराने लगा है।
इस बार सरकार ने बाजरा की सरकारी खरीद को लेकर गांव वाइज शेड्यूल जारी किया था। कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारियों ने बाजरा की सरकारी खरीद के लिए टोकन सिस्टम अपनाया और ऑनलाइन किसानों के फोन पर खरीद का मैसेज भी भेजा गया। शुरूआत में किसानों को कुछ मुश्किलें आई, मगर जिले के अधिकांश किसानों का बाजरा सरकारी तौर पर खरीद हो गया। खरीद के बाद इस बाजरे को दूसरे जिले में भेजने की तैयारी भी हुई, लेकिन पहले से ही वहां के गोदाम फुल मिले, जिसके चलते बाजरे का लदान तो हुआ मगर इसे मजबूरी में अनाज मंडी के शेड के नीचे ही लगाना पड़ा। शुरूआत में आढ़तियों ने भी शेड के नीचे बाजरा लगाए जाने का विरोध किया, मगर उनका विरोध काम नहीं आया। अब फूड सप्लाई के बाद वेयर हाउस और एचडब्ल्यूसी के माध्यम से बाजरा की सरकारी खरीद चल रही हैं, लेकिन दो दिनों से खरीद किया गया बाजरा भी अनाज मंडी के शेड के नीचे ही लगाया जा रहा है। हालांकि शेड के नीचे लगाए गए बाजरे के बारिश में भीगने की कोई गुंजाइश ही नहीं बची हैं, लेकिन ज्यादा दिनों तक इस तरह खुले में रखे जाने के कारण इसकी गुणवत्ता पर असर जरूर पड़ेगा।
भिवानी जिले के गोदामों में पहले से ही सरसों लगी हुई हैं। सरसों का उठान किए जाने के संबंध में हैफेड अधिकारियों को लिखा जा चुका है। किराये पर भी गोदाम लेने का काफी प्रयत्न विभाग द्वारा किया गया है, लेकिन कोई भी गोदाम नहीं मिला। इस वजह से मजबूरी में बाजरा मंडी में लगाना पड़ा। लेकिन अब नवंबर और दिसंबर माह में ये बाजरा डिपो पर सप्लाई के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद अधिकांश बाजरे का उठान भी सुनिश्चित हो जाएगा।
- अनिल कालरा, डीएफएससी भिवानी।