दिवाली पर बढ़ा प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को प्रदूषण का स्तर 373 एक्यूआई दर्ज किया गया। बढ़े प्रदूषण के अब लोगों के स्वास्थ्य पर भी व्यापक असर दिखने लगा है। अधिकतर लोग गले में खराब, गले में दर्द, एलर्जी, खांसी, दमा के शिकार हो रहे है वहीं मरीजों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। मरीजों की संख्या लगभग दोगुना हो गई है।
दिवाली के बाद गहराया पर्यावरण प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक बनता जा रहा है। 373 एक्यूआई तक पहुंच चुके पर्यावरण प्रदूषण में सांस ले रहे लोग अनेक बीमारियों का शिकार हो रहे है। शुरूआती तौर पर लोग गले में खराश, गला दर्द, एलर्जी, खांसी-जुकाम के शिकार हो रहे है। सांस लेने में तकलीफ के मामले भी बढ़ गए है। बुजुर्गों के साथ बच्चों में भी यह समस्या बढ़ गई है, जो कि चिंता का विषय है। पहले 15 से 20 बच्चे सामान्य अस्पताल की ओपीडी में ऐसे आते थे, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ की समस्या थी मगर अब ये संख्या 30 से 35 हो गई है। दमा के मरीजों के लिए यह प्रदूषण घातक साबित हो रहा है और अस्पताल में इनकी संख्या दोगुना तक बढ़ गई है।
पीएम 2.5 और पीएम 10 में लगातार हो रही बढ़ोतरी
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। दिवाली के अगले दिन पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों ही 500-500 दर्ज किए गए थे। 29 अक्तूबर को इनमें कुछ कमी हुई और पीएम 2.5 की मात्रा 436 और पीएम 10 की मात्रा अधिकतम 317 दर्ज की गई। मगर 30 अक्तूबर को ये फिर से बढ़ गए है। पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 451 और पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 422 तक पहुंच गई। 31 को भी इनमें वृद्धि हुई। पीएम 2.5 की मात्रा 494 और पीएम 10 की मात्रा 491 दर्ज की गई। ये बहुत ही खतरनाक स्तर है।
पिछले कुछ दिनों का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडक्स)
तिथि एक्यूआई
31 अक्तूबर 373
30 अक्तूबर 378
29 अक्तूबर 347
28 अक्तूबर 349
27 अक्तूबर 343
26 अक्तूबर 222
25 अक्तूबर 154
24 अक्तूबर 151
23 अक्तूबर 142
22 अक्तूबर 116
21 अक्तूबर 112
20 अक्तूबर 108
19 अक्तूबर 75
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क्या है एक्यूआई के मापदंड
एक्यूआई प्रभाव
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201 से 300 खराब
301 से 400 ज्यादा खराब
400 से ज्याद बेहद खतरनाक
पर्यावरण प्रदूषण लोगों खासकर बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। पटाखों का प्रदूषण और धूल के कारण बच्चे सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी, खांसी-जुकाम, गले में इंफेक्शन के शिकार हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण कम नहीं हुआ तो समस्या बन सकता है।
- डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ