भिवानी। अंबाला और यमुनानगर में नदियों के उफान के साथ ही बाढ़ का पानी आफत बना है। इसी के साथ भिवानी जिले की नहरों में भी बारिश के बाद सुंदर ग्रुप, मिताथल और जूई फीडर में पानी छोड़ा गया है। हालांकि नहरों में डिमांड से काफी कम पानी चल रहा है, मगर बाढ़ का अतिरिक्त पानी भी नहरों के रास्ते यहां आने से आफत बढ़ने का अंदेशा बना है।
इसी को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारी हर दो घंटे बाद नहरी पानी की रिपोर्ट भी ले रहे हैं। बारिश के साथ बाढ़ का पानी भी नहरों के रास्ते जलघर के टैंकों तक पहुंचा तो पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालेगा। क्योंकि ये पानी जलजनित बीमारियों के संक्रमण को बढ़ाएगा।
सुंदर ग्रुप की नहर में इस समय 850 क्यूसेक पानी चल रहा है। जबकि इसमें 900 क्यूसेक पानी की डिमांड है। इसी तरह मिताथल में 100 क्यूसेक पानी है वहीं इसमें 350 क्यूसेक पानी की डिमांड भेजी हुई है। जूई फीडर में भी 703 क्यूसेक पानी चल रहा है। जबकि इसमें 900 क्यूसेक पानी की डिमांड भेजी थी। फिलहाल ये तीनों नहरों में बिना शेड्यूल के अब पानी से लबालब हैं, क्योंकि नदियां पूरे उफान पर हैं।
बारिश होने के बाद किसानों को भी अब खेतों की सिंचाई के लिए नहरी पानी की जरूरत नहीं है। वहीं जलभराव संभावित इलाकों में पहले से ही किसान पानी निकासी के प्रबंधों की गुहार लगा रहे हैं। पेयजल जरूरतों के लिए इस समय पानी के टैंक भरे जा रहे हैं। मगर बारिश के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का पानी भी नहरों के जरिये टैंकों तक पहुंच रहा है। बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का संक्रमण पहले से ही सेहत को घेरे हुए हैं, ऐसे में बाढ़ का पानी क्लोरिनेशन के बाद भी शुद्ध नहीं हो पा रहा है।
सुंदर ग्रुप, मिताथल और जूई फीडर में फिलहाल डिमांड से काफी कम पानी चल रहा है। हर दो घंटे बाद नहरों में पानी की स्थिति की रिपोर्ट ली जा रही है। बारिश के बाद नहरों में पानी और बढ़ेगा। फिलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में हैं, सभी नहरों की भी मॉनिटरिंग करा रहे हैं।
-जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता, वाटर सर्विसेज भिवानी सिंचाई विभाग।