तोशाम। एसडीएम डॉ. अशवीर सिंह नैन ने कहा कि पशु पालन एवं डेयरी विभाग की ओर से भी सर्दी को लेकर पशुओं के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। ताकि पशुपालक सर्दी में अपने पशुओं का खास ध्यान रख सके।
उन्होंने कहा कि पशुपालक पशुओं को सर्दी से बचाएं। सर्दियों में सबसे ज्यादा प्रभाव दुधारू पशु पर पड़ता है। अगर वह सर्दी की चपेट में आ जाते हैं, तो उसे उनके दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। उनके साथ-साथ पशुओं के छोटे बच्चों पर भी सर्दी का खास असर दिखाई देता है।
उपमंडल पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि सर्दियों के मौसम में निश्चित तौर पर दूध देने वाले पशु के दूध उत्पादन पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक हो सकता है। इसमें दूध उत्पादन कम हो जाता है। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एकदम से जब पशुओं को सीधी ठंडी हवा लगती है, तो वह ठंड की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए विशेष तौर पर इस बात का ध्यान रखें। पशुओं को ऐसे स्थान पर रखें जहां पर सीधी हवा न लगती हो और दिन के समय वहां पर धूप आती हो। सर्दी के समय में पशुओं के बांधने के स्थान पर गीला न रहने दें। क्योंकि अक्सर धूप कम होने के चलते नीचे से पशुओं का स्थान सूखता नहीं है। ऐसे मौसम में सूखा व खराब चारा पशुओं के नीचे डालें। ताकि पशुओं को ठंड न लगे। अगर पशुओं के बाड़े में कहीं से हवा आ रही है, तो उसको भी रोकने के लिए प्रबंध करें।
उन्होंने बताया कि सर्दियों के समय में पशुओं के चारे, फीड और पीने के पानी का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। मौजूदा समय में किसानों के पास भरपूर मात्रा में हरा चारा होता है। हरे चारे में पानी की मात्रा ज्यादा होती है और सर्दी के समय ज्यादा हरा चारा देना पशु के लिए हानिकारक हो सकता है। उसको ठंड लग सकती है। इसलिए जब पशु को चारा डालते हैं, तो उसमें 25 प्रतिशत हरा चारा और 75 प्रतिशत सूखा चारा मिलकर ही पशु को दें।
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पशुओं के खानपान का रखें ध्यान
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि पशु को पीने के लिए ताजा और साफ पानी दे। कई बार किसान जहां पर पशु पानी पीते हैं, उसका एक अलग स्थान बना देते हैं और पशुओं को रात का ठंडा पानी सुबह पिला देते हैं। जिसे वह बीमार हो जाते हैं। सर्दियों के मौसम में पशुओं को ताजा पानी ही पिलाएं जो ज्यादा ठंडा न हो। पशुओं को मिक्सर फीड दे सकते हैं और सर्दियों के समय प्रत्येक पशु को उसकी क्षमता के अनुसार मिक्सर फीड दें। जो दुधारू पशु होते हैं, उसको दूध के अनुसार फीड दें और अन्य पशुओं को प्रतिदिन एक किलोग्राम फीड अवश्य दें। प्रत्येक पशु को 200 से ढाई सौ ग्राम गुड़ प्रतिदिन आवश्यक दें।
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छोटे पशुओं का रखें विशेष ध्यान
पशु चिकित्सक ने बताया कि सर्दियों का सबसे ज्यादा असर पशुओं के छोटे बच्चे पर होता है। क्योंकि उसकी बीमारी या सर्दी से लड़ने की क्षमता कम होती है। ऐसे में सबसे पहले छोटे बच्चे ही सर्दी की चपेट में आते हैं। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को सर्दी से बचने के लिए किसी कपड़े या बोरी को उसके ऊपर ढक कर रखें। उसको सुबह शाम दोनों समय उसकी मां का ताजा दूध पिलाएं। छोटा बच्चा चारा नहीं खाता। इसलिए उसका ज्यादा ध्यान रखें, उसको उसकी मां के पास रखें। ताकि हवा या ठंड का उस पर असर ना हो।