अस्थायी तौर पर 2010 में लगाए गए फ्यूल चार्ज को लेकर भिवानी महापंचायत ने लामबंदी शुरू कर दी है। चेताया कि एक महीने में फ्यूल चार्ज समेत उनकी मांग नहीं मानी गई तो प्रदेश व्यापी आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।
महापंचायत ने सिलसिलेवार कई घोटालों का जिक्र करते हुए महंगी बिजली का ठीकरा विभाग के सिर फोड़ा। कहा कि बिजली चोरी की वजह से नहीं, बल्कि बिजली निगम के घोटालों और गलत नीतियों के कारण महंगी मिल रही है। आरोप लगाया कि पिछले 17 साल मेें करीब 30 हजार करोड़ के घोटाले हुए।
भिवानी महापंचायत के बैनर तले बृहस्पतिवार को वैश्य कॉलेज के सामने महापंचायत कार्यालय में विभिन्न सामाजिक संगठनों की बैठक हुई। बैठक में बिजली का बढ़ता दर्द लोगों की जुबान पर आया। सदस्यों ने बताया कि अगर सरकार चंडीगढ़ कार्यालय में हो रही डकैती को रोके तो हम सारे बिजली बिल भरवाएंगे और बिजली चोरी भी रोकेंगे।
पंचायतियों ने एक-एक कर बिजली निगम के घोटालों का खुलासा किया और बताया कि बिजली चोरी के कारण महंगी नहीं बल्कि निगम के घोटालों और प्रयोगों के कारण महंगी हुई है।
पंचायत में फैसला लिया गया कि सोमवार को जिले की बिजली समस्याओं के लिए डीसी व निगम के एससी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। एक महीने में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापाी आंदोलन होगा।
पंचायत में नप के चार पूर्व प्रधानों, दर्जनभर पार्षदों के साथ व्यापारियों ने भी अपना समर्थन दिया। पंचायत की अध्यक्षत वरिष्ठ कर्मचारी नेता प्यारेलाल ने की तो संचालन भिवानी महापंचायत संयोजक संपूर्ण सिंह ने किया।
आरटीआई कार्यकर्ता अरूण श्योकंद ने भी निगम के घोटालों का खुलासा किया। बैठक में नप के पूर्व चेयरमैन विजय पचगावा, मामनचंद, सूबे सिंह ढिल्लो, मदनपाल, नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष भानू प्रकाश, अग्रवाल समाज अध्यक्ष विजय टैनी, पार्षद पूरणचन्द, ऑटो मार्केट प्रधान वीरभान, पार्षद अनिल, पार्षद गोबिन्दराम, पार्षद जगदीश, पार्षद विजय शांडिल्य, कुंवर बीरसिंह, कमल प्रधान, बलवान प्रधान, गिरधारी लाल, शशी भूषण, बिशम्भर अरोड़ा, कैप्टन सुरेश तंवर बबलू भटनागर, वैज्ञानिक आरएस शेखावत, मदन यादव आदि मौजूद रहे।
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एफएसए हटे तो 15 प्रतिशत कम हो बिल
वर्ष 2010 में एफएसए बंद करने का फैसला लिया गया और पूरे देश में इसी बंद कर दिया गया। मगर हरियाणा में आज भी वसूला जा रहा है। न केवल वसूला जा रहा है जबकि हर साल इसमें वृद्धि की जा रही है।
फिलहाल 1.14 से 164 रुपये प्रति यूनिट एफएसए वसूला जा रहा है। अगर यह हट जाए तो 15 से 20 प्रतिशत तक बिजली बिल कम हो सकता है।
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हरियाणा के मुकाबले चंडीगढ़ का बिल 70 फीसदी कम
पंचायतियों ने बिजली का प्रदेशानुसार टैरिफ प्लान दिखाते हुए बताया कि सबसे महंगी बिजली हरियाणा को मिल रही है। चंडीगढ़ में बिजली दर 1.62 रुपये प्रति यूनिट (150 यूनिट तक है)। हरियाणा मेें 11 सौ यूनिट खपत करने वाले उपभोक्ता से बिल के रूप में 9229 रूपए वसूले जाते हैं।
इतनी ही यूनिट के चंडीगढ़ में 2940, यूपी में 51 सौ, पंजाब में 6648, राजस्थान में 6190, दिल्ली में 6170, बिहार में 4760, महाराष्ट्र में 7663, आन्ध्रप्रदेश मेें 7112, गुजरात में 4960, मध्यप्रदेश में 5470, अरूणाचल प्रदेश में 7183, छत्तीसगढ़ में 2950, गोवा में 2533, हिमाचल प्रदेश में 4765, जम्मू कश्मीर में 4868, कर्नाटक में 6147, केरला में 8250, तेलंगाना में 6860, बिहार में 4760 व उत्तराखंड में 3390 रूपए वसूले जाते हैं।
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लोग बोले, कहां से भरें 48 हजार रुपये बिल
पिलर बॉक्स लगाते समय वायदा किया गया था कि 30 फीसदी कम बिल आएगा और 24 घंटे बिजली मिलेगी। लेकिन बिल दोगुना हो गया। पंचायत में नप के पूर्व चेयरमैन विजय पंचगावा ने बताया कि उसका दो महीने का बिल 48 हजार आया। वह ठीक कराने गया तो एप्लीकेशन लिखवाई और बताया कि चेक कर बताएंगे। दो महीने बाद अगला बिल आया 68 हजार का। जब पूछा तो बताया कि बिल भरना होगा वरना कनेक्शन कटेगा। पूरा बिल भरकर पीछा छुड़वाया। अब बिल आया है 28 हजार। इतना बिल कहां से भरें।
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पहले तीन हजार आता था अब 67 सौ
पटेल नगर वासी रण सिंह ने बताया कि पहले तीन हजार रुपये तक बिल आता था और अब 67 सौ बिल आ रहा है। कहां से बिल भरे और कैसे घर चलाएं।
नहीं भरूंगा बिल
व्यापारी नेता गिरधारी लाल ने बताया कि छह से आठ हजार रुपये बिल आ रहा है। कहां से भरें। अब वह आगे से बिल ही नहीं भरेंगे।
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इन घोटालों का किया खुलासा
* 50 हजार ट्रांसफार्मर खरीद घोटाला: पंचायतियों ने खुलासा किया कि निगम ने हैदराबाद की एक कंपनी के साथ सांठ-गांठ कर ट्रांसफार्मर खरीदे। करीब 50 हजार ट्रांसफार्मर प्रदेशभर में खरीदे गए। अकेले भिवानी के लिए तीन हजार ट्रांसफार्मर आए। सभी छह माह से एक साल के अंदर जवाब दे गए। एक-एक ट्रांसफार्मर की कीमत दो से ढाई लाख रुपये रही।
* स्क्रैप घोटाला: बिजली निगम में जले ट्रांसफार्मर, आयरन स्क्रैप, एल्यूमिनियम, कॉपर व अन्य स्क्रैप, डिस्मेंटल सब स्टेशन आदि से भी करीब 1551 करोड़ का घोटाला किया गया है।
* डीटी मीटर, एमसीसीडी व कैमरे: बिजली चोरी की जांच के लिए ट्रांसफार्मर पर डीटी मीटर लगाए गए। ट्रांसफार्मरों को जलने से बचाने के लिए एमसीसीडी लगाए गए। मगर आज तक न तो डीटी मीटरकी रीडिंग ली गई और न ही एमसीसीडी से ट्रांसफार्मरों के जलने का सिलसिला रुका।
इनकी खरीद में मोटा घोटाला हुआ। इनके अलावा लोड रिमोड कंट्रोल भी खरीदे गए मगर आज स्टोर में पड़े जंग खा रहे है।
* छह बार मीटर बदले और इंसूलेटिड केबल: पंचायतियों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में छह बार अलग-अलग तरह के मीटर बदले गए। इनकी खरीद में भी कंपनियों के साथ मिलकर घोटाला किया गया।
इंसूलेटिड केबल की बात की जाए तो भिवानी 132 केवी से जेल फीडर तक लाइन डाली गई मगर 10 दिन में ही जवाब दे गई।
* एक लाख का पिल्लर बॉक्स: पंचायतियों ने बताया कि पिल्लर बॉक्स में बड़ा घोटाला हुआ। एक पिल्लर बॉक्स करीब एक लाख रुपये का पड़ा है। इसमें करीब 19 हजार का तो खाली बाहर का बॉक्स है।
पिल्लर बॉक्स लगाते समय नियमानुसार गड्डा खोद अर्थिंग की जाती है। पिल्लर बॉक्स का बेस तैयार किया जाता है। इसके लिए कंपनी को प्रति पिल्लर बॉक्स नौ हजार रुपये की पेमेंट की गई।
50 फीसदी पेमेंट एडवांस की गई। अब हाल यह है कि भिवानी में किसी पिल्लर बॉक्स की अर्थिंग नहीं और सभी पिल्लर बॉक्स दीवार के सहारे खड़े है।
* ठेकेदारों संग मचाई लूट: निगम ने बड़े कार्य बिजलीघर बनाना,फीडर निकालना, ट्यूबवेल कनेक्शन देना आदि कार्य टर्नकी आधार पर ठेकेदारों से करवाए। जिसमें कमीशन व लूट मचाई गई।
करीब 20 हजार करोड़ का घाटा हुआ। ताप घरों के निर्माण में करीब पांच हजार करोड़ की कमीशन खोरी हुई।
* ट्रांसपोर्टेशन में बन रहे फर्जी बिल: साइकिल पर एक मीटर कनेक्शन करने कर्मचारी जाता है तो ट्रांसपोर्ट का बिल बनता है। फर्जी बिलों के सहारे ट्रांसपोर्टेशन, लोडिंग-अनलोडिंग में करीब 20 हजार करोड़ का घोटाला है।
* आउट सोर्सिंग घोटाला: निगम बनने के बाद मीटर रीडिंग, बिल डिस्ट्रीब्यूशन, कैश कलेक्शन आदि कार्य बगैर टैंडर के 12 रुपये प्रति कनेक्शन के दिए है। टेंडर से दो या तीन रुपये प्रति कनेक्शन हो सकते है। ठेके पर लगे कर्मचारी अधिकतर समय ड्यूटी पर जाते ही नहीं। इसमें भी सालाना 10 करोड़ का घोटाला है।
फोटो 07 से 11