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Bhiwani News: पटवारियों की हड़ताल के बीच तहसीलदार ने खुद किया डिजिटल क्रॉप सर्वे

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गांव बड़ेसरा के खेतों में डिजिटल क्रॉप सर्वे करते तहसीलदार व उनकी टीम।
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भिवानी। प्रदेशभर में पटवारियों और कानूनगो की 20 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल चल रही है। इस बीच शुक्रवार को भिवानी तहसील के तहसीलदार जयवीर सिंह गांव बड़ेसरा पहुंचे और डिजिटल क्रॉप सर्वे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए खेतों का दौरा किया। तहसीलदार ने धान और बाजरा के खेतों में तीन से चार घंटे रहकर मोबाइल एप के माध्यम से करीब 15 सर्वे किए।
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धान के खेतों में पानी के बीच उतरकर और बाजरा की ऊंची फसल के बीच पहुंचकर उन्होंने सर्वे की व्यवहारिकता परखी और इसे चुनौतीपूर्ण व जोखिम भरा बताया। तहसीलदार जयवीर सिंह ने बताया कि खेतों में जाकर प्रत्येक फसल का सर्वे करना आसान नहीं है। उन्होंने मोबाइल एप के माध्यम से सर्वे की पूरी प्रक्रिया समझी और इसकी व्यवहारिकता की जांच की। इस दौरान उन्होंने खुद अनुभव किया कि खेतों के बीच जाकर सर्वे करना कितना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने माना कि पटवारी के लिए धरातल पर यह काम जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि मौके की स्थिति की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।

तहसीलों में राजस्व से जुड़े काम प्रभावित हो रहे
पटवारी और कानूनगो एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास राठी ने बताया कि पटवारी इंतकाल के लिए शुरू किए गए नए पोर्टल सिस्टम और डिजिटल क्रॉप सर्वे का विरोध कर रहे हैं। इसके खिलाफ उनका आंदोलन जारी है। हड़ताल के कारण तहसीलों में राजस्व से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। उच्च अधिकारियों के साथ हुई वार्ता भी अब तक किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाई है। पटवारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया है।
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मैंने गांव बड़ेसरा के खेतों में पहुंचकर खुद डिजिटल क्रॉप सर्वे की हकीकत जानने के लिए सर्वे एप के माध्यम से सर्वे किया है। यह जोखिम भरा काम है। धान के खेतों में पानी जमा है और बाजरा की छह से सात फीट ऊंचाई तक फसल आ चुकी है। इसमें जहरीले जानवरों का खतरा भी रहता है। जिस खेत और किला की डिजिटल क्रॉप सर्वे होनी है, उसके 30 से 40 मीटर अंदर तक जाना अनिवार्य है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। - जयवीर सिंह, तहसीलदार, भिवानी तहसील

एक गांव में हजारों एकड़ भूमि, कैसे संभव होगा प्रत्येक किले का डिजिटल सर्वे : विकास राठी
पटवारी कानूनगो एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास राठी ने बताया कि एक गांव में हजारों एकड़ क्षेत्र है। पूरे दिन एक पटवारी खेतों में रहे तो भी अधिकतम करीब 20 सर्वे ही कर पाएगा। सरकार ने सर्वे के लिए 45 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। कई गांवों में क्षेत्रफल 10 हजार एकड़ से अधिक है। प्रत्येक फसल का डिजिटल सर्वे किया जाना है ताकि सरकारी रिकॉर्ड का मिलान किया जा सके। यह संभव नहीं है। इसलिए उनका विरोध जारी है।
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