दिवाली के बाद पर्यावरण प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रही है। वायु में प्रदूषण का स्तर साढ़े तीन गुणा ज्यादा बढ़ गया है। आसमान में सोमवार को दिनभर हलका धुआं देखा गया। जो वायु प्रदूषण के कारण बना स्मॉग बताया जा रहा है। औसत एक्यूआई जो 100 से कम होना चाहिए, फिलहाल बढ़कर 349 तक पहुंच गया है, जिसे विशेषज्ञ बहुत खराब मान रहे हैं। दिवाली पर रोक के बावजूद भी प्रतिबंधित तेज आवाज, तेज धुएं वाले पटाखे खूब चले। देर रात तक पटाखे चलाने का सिलसिला चला। जिससे अचानक ही वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा खराब हुआ। अब बुजुर्गों को जहां सांस लेने में तकलीफ हो रही है वहीं आंखों में जलन होने से लोग परेशान है।
हवा का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) औसत आधार पर 100 माइक्रोग्राम प्रति मीट्रिक क्यूब तक होना चाहिए। 19 अक्तूबर का जिले का वायु प्रदूषण 75 एक्यूआई था। मगर उसके बाद अचानक वायु प्रदूषण बढ़ने लगा। 25 अक्तूबर को यह बढ़कर 154 एक्यूआई हो गया और अगले ही दिन यानी 26 अक्तूबर तक 222 दर्ज किया गया। 24 अक्तूबर की सुबह 343 रहा तो 28 अक्तूबर की सुबह यह बढ़कर 349 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय में यह बहुत ज्यादा खराब है। स्वास्थ्य के लिए भी यह नुकसानदायक है।
यूं मापा जाता है वायु में प्रदूषण : प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से जांच की जाती है कि वायु में पीएम (परटिक्यूलेट मैटर) 2.5 व पीएम 10 कितना है। ये पता होने के बाद दोनों का औसत निकाला जाता है। जिसे औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) कहा जाता है। इस एक्यूआई से ही पता चलता है कि हवा में कितना प्रदूषण है। इस समय यह एक्यूआई काफी ऊपर पहुंचा हुआ है। इसका कारण सीधे तौर पर पटाखों से निकला जहरीला धुआं है।
मुंह पर मास्क व आंखों पर लगाएं चश्मा, ठंडा पानी है घातक : वायु प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन की समस्या से जूझना पड़ रहा है वहीं बुजुर्गों, बीमार लोगों, बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी की समस्या हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ दिन यह पटाखों का प्रदूषण परेशानी बनेगा। इसके अलावा लोग पराली न जलाए। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि शरीर के अंदर गए कण ठंडे पानी से जम जाते है। जहां तक संभव हो बिना किसी कारण के घर से नहीं निकलना चाहिए और घर से निकलते समय मुंह पर मास्क व आंखों पर चश्मा लगाना चाहिए। आंखों को दिन में तीन-चार बार धोना चाहिए।
पिछले कुछ दिनों का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडक्स)
तिथि एक्यूआई
28 अक्तूबर 349
27 अक्तूबर 343
26 अक्तूबर 222
25 अक्तूबर 154
24 अक्तूबर 151
23 अक्तूबर 142
22 अक्तूबर 116
21 अक्तूबर 112
20 अक्तूबर 108
19 अक्तूबर 75
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प्रदूषण का स्तर पीएम 10, 2.5
तिथि पीएम 2.5 पीएम 10
24 अक्तूबर 143 194
25 अक्तूबर 367 194
26 अक्तूबर 379 216
27 अक्तूबर 422 313
28 अक्तूबर 500 500
क्या है एक्यूआई के मापदंड
एक्यूआई प्रभाव
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201 से 300 खराब
301 से 400 ज्यादा खराब
400 से ज्यादा बेहद खतरनाक
पटाखे चलाने से प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। अब भी ऐसा है। हवा में दिख रहा धुएं की चादर पटाखों के धुएं के कारण ही है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी नुकसानदायक है।
हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
चरखी दादरी की हवा भी स्वास्थ्य के लिए घातक : भिवानी जिले की ही नहीं चरखी दादरी की हवा भी दिवाली के बाद स्वास्थ्य के लिए काफी घातक हो गई है। यहां सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स 327 रहा। यहां पीएम (परटिक्यूलेट मैटर) 2.5 व पीएम 10 भी ज्यादा रहा। पीएम 2.5 की मात्रा 400 के पार रही तो पीएम 10 भी 470 के करीब रहा। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दादरी में वायु स्वास्थ्य के लिए कितनी घातक है।