भिवानी। नगर परिषद की सियासत में पांच दिन बाद नए समीकरणों की उधेड़बुन शुरू हो जाएगी। वर्तमान नगर पार्षदों का कार्यकाल आठ फरवरी को पूरा हो जाएगा। शहर के अंदर अभी भी अधूरे पड़े विकास कार्यों को लेकर नप चेयरमैन रण सिंह यादव ने पार्षदों से अपने-अपने वार्डों के अंदर लंबित कार्यों की रिपोर्ट तलब की है। इस रिपोर्ट को उपायुक्त को सौंपा जाएगा, जिसके बाद उपायुक्त ही शहर के अधूरे विकास पर संज्ञान लेंगे।
पांच साल के कार्यकाल के दौरान शहर में करीब 200 करोड़ से अधिक का बजट विकास कार्यों पर खर्च हुआ है। इतना ही नहीं दो हजार से अधिक कच्ची गलियों को भी पक्का किया जा चुका है, लेकिन अब भी कई ऐसे मुख्य मार्ग बदहाल हैं, जिन पर पैदल चल पाना भी मुश्किल है। इसके अलावा कई ऐसे परियोजनाएं भी अटक जाएंगी, जिन पर काम होना बेहद जरूरी था। 2022 में शहर को नई सरकार बनानी है। नई वार्डबंदी के मुताबिक तो वर्तमान पार्षदों की राजनीतिक जमीन भी खिसक गई हैं, ऐसे में अब नए सिरे से पार्षद बनने के लिए वार्डों के अंदर विकास को छोड़ चुनाव जीतने की उधेड़बुन भी शुरू हो जाएगी। हालांकि कई पार्षद को बहुत पहले से ही चुनावी दौड़ में जोर आजमाइश में जुटे हैं।
नगर परिषद भिवानी में आठ जनवरी 2017 में 31 वार्डों से पार्षद चुने गए थे। फिलहाल शहर के अंदर करीब ढाई लाख लोगों की आबादी है। इसमें से महज करीब डेढ़ लाख वोटर हैं। यानी कुल आबादी का 60 फीसदी वोटर हैं। इनमें भी युवा वोटर 50 फीसदी से अधिक हैं। पांच साल तक मोटा बजट खर्च हुआ। इसके बावजूद भी शहरी वार्डों के अंदर काफी ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान अभी होना बाकी है। पार्षदों की मानें तो ज्यादातर समस्याएं पेयजल जरूरतों और सीवर से जुड़ी हैं। जिनके समाधान के लिए कई पार्षद भी लोगों के साथ पब्लिक हेल्थ अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर काटकर थक चुके हैं। पांच साल के दौरान कई बार नौबत यह भी आई कि जनसमस्याओं को लेकर नप पार्षदों को विरोध का सामना करना पड़ा, जबकि नप कार्यालय के गेट पर भी ताला जड़ पार्षदों को धरने पर बैठने पर मजबूर होना पड़ा।
नप चेयरमैन ने पार्षदों से मांगा इन समस्याओं का ब्योरा
नगर परिषद चेयरमैन रणसिंह यादव ने सभी पार्षदों से अपने-अपने वार्डों में सीवर, पेयजल, गंदा पानी सप्लाई में आना, साफ सफाई, स्ट्रीट लाइट, बिजली व अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का विवरण मांगा है। वार्ड पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं का लिखित विवरण दर्ज कराकर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कार्यालय को भी अवगत कराएंगे। वार्डों से जुड़ी संबंधित समस्याओं को लेकर नप चेयरमैन ने उपायुक्त दरबार ले जाने का मन बनाया है। ताकि इन समस्याओं पर प्रशासन अब कड़ा संज्ञान ले सके।
नहीं हो पाई अंतिम बैठक, नप अधिकारियों ने भी नहीं दिखाई रुचि
फरवरी के प्रथम सप्ताह में नप पार्षदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, लेकिन इससे पहले नप सदन की अंतिम बैठक भी नहीं हो पाई। नगर परिषद अधिकारियों ने भी अंतिम बैठक को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई। भिवानी नगर परिषद में कार्यकारी अधिकारी पद का हांसी नप के कार्यकारी अधिकारी मनेंद्र सिंह श्योकंद के समक्ष अतिरिक्त कार्यभार है। इसलिए सप्ताह में मुश्किल से दो बार ही उनका यहां आना हो पाता है। मगर जनवरी में अंतिम बैठक तय हुई तो कार्यकारी अधिकारी नहीं पहुंचे, जिसकी वजह से नप सदन के मसौदे पर कोई चर्चा नहीं हो पाई।
ये परियोजनाएं लटकीं, नहीं बढ़ा पाए आमदनी
पांच साल तक पार्षद नगर परिषद की आमदनी बढ़ाने के मंथन में जुटे रहे, मगर आमदनी नहीं बढ़ी। नप की करोड़ों रुपयों की बेशकीमती जगह पड़ी हैं, मगर इस पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ। इसी के साथ करीब डेढ़ किलोमीटर का दिनोद रोड भी नहीं बना। इसे बनाने के लिए करीब दो करोड़ का मसौदा सरकार के समक्ष भेजा हुआ है। इसी तरह नप की कई अन्य परियोजनाएं भी पूरी नहीं हो पाईं। (संवाद)
समान रूप से किया काम, फिर भी कुछ समस्याएं रह गईं
नगर परिषद का कार्यकाल आठ फरवरी को पूरा हो जाएगा। इससे पहले सभी पार्षदों से अपने-अपने वार्डों के अंदर अधूरे रह गए विकास कार्यों व जनसमस्याओं के समाधान के लिए विवरण मांगा है। इसे उपायुक्त के समक्ष भेजा जाएगा। जिस पर उपायुक्त ही संज्ञान लेंगे। हमने पांच साल तक शहर के सभी वार्डों में समान रूप से काम कराने का भरसक प्रयास किया। इसके बावजूद संबंधित विभागों की पेयजल, सीवर और स्ट्रीट लाइटों से जुड़ी कई समस्याएं अभी भी बनी रह गई हैं।
-रण सिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी।