राजीव गांधी राजकीय महिला महाविद्यालय के बाहर बच्चे को संभालने की ड्यूटी निभाता युवक।
भिवानी। संयुक्त पात्रता परीक्षा (सीईटी) के चलते दो दिन की अभ्यर्थियों के साथ प्रशासन को कड़ी परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ा। इसके अलावा इम्तिहान तो उन बच्चों का भी था जिनकी माताएं परीक्षाएं देने पहुंचीं।
बच्चों को पिता, दादा-दादी ने संभाला। समय बिताने के लिए किसी ने पार्कों तो किसी ने बच्चों दुकानों में घूमाया। कभी बच्चे को मोबाइल देते तो कभी टॉफी यॉ चॉकलेट देकर बच्चों को बहलाया। जैसे ही करीब तीन घंटे बाद महिला परीक्षार्थी परीक्षा देकर लौटीं ताे अभिभावकों ने राहत महसूस की तो बच्चों के चेहरे पर भी खोई मुस्कान लौट आई। रविवार को सीईटी देने के लिए ननद- भाभी और भाई-बहन परीक्षा देने पहुंचे थे।
उमस भरी गर्मी में मासूमों के चेहरे हो गए लाल
उमस भरी गर्मी में नौनिहालों के चेहरे भी लाल हो गए थे। कुछ परीक्षा केंद्रों के आसपास बैठने की कोई व्यवस्था भी नहीं थी। खाली जगह पर वाहन पार्किंग किए गए थे। कोई पिता तो कोई दादी और दादा छोटे बच्चों को गोद में संभाले उन्हें यह दिलासा दे रहे थे कि मम्मी जल्दी आएगी। गांव सिसाय निवासी मनित ने बताया कि वह अपनी पत्नी का पेपर दिलाने के लिए आया है। बच्चा छोटा है लेकिन उसके साथ खेलने से सारी थकान दूर हो रही है। हालांकि बच्चा बीच-बीच में मम्मी का याद जरूर करता है। हिसार से परीक्षा देने आई सोनिया ने बताया कि वे अपने दो साल के बच्चे के साथ परीक्षा देने आई है। उनका दो साल का बेटा परीक्षा के दौरान उनके पापा के पास ही रहेगा। हिसार से अपनी बेटी सुजल की परीक्षा दिलाने आई बुजुर्ग महिला ने अपने दोहते को गर्मी से बचाने के लिए अपने दुपट्टïे को सुरक्षा कवच बनाया।
रेडक्राॅस वाॅलंटियर्स ने दिया दिव्यांग परीक्षार्थियों को सहारा
सीईटी के दौरान जिला रेडक्राॅस वाॅलंटियर्स दूसरे दिन दिव्यांगजन परीक्षार्थियों के लिए सहारा बने। इस दौरान परीक्षा देने पहुंचे दिव्यांगों को व्हील चेयर के माध्यम से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। इस दौरान रेडक्रास सोसाइटी के सचिव प्रदीप हुड्डा भी अपनी गाड़ी में दिव्यांगजनों को उनके परीक्षा केंद्रों पर लेकर पहुंचाने में लगे रहे।