हरियाणा के भिवानी में डाडम पहाड़ी में हुए हादसे की जांच को लेकर उपायुक्त ने एडीसी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद दो दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।
भिवानी के डाडम माइनिंग जोन में हुए बड़े हादसे के बाद अब हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी मामले की जांच कराएगा कि कहीं यहां पर नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा था। बोर्ड के मेंबर सचिव एस नारायण का कहना है कि वे इससे संबंधित दस्तावेज मंगवा रहे हैं और इसकी जांच कराई जाएगी।
प्राथमिक तौर पर खनन करने वाले कंपनी की भी कुछ खामियां सामने आ रही हैं। अब तक के घटनाक्रम के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने जब मौके पर पहुंचकर फर्म से हादसा स्थल पर मौजूद कर्मचारियों की लिस्ट मांगी तो फर्म वह उपलब्ध नहीं करा पाई। फर्म द्वारा उन 51 कर्मचारियों की लिस्ट उपलब्ध कराई गई जो वहां काम करते हैं। उसके बाद प्रशासन ने लिस्ट के आधार पर जांच की। पता लगाया कि कौन छुट्टी पर था और कौन-कौन हादसे में सुरक्षित बचा है। इससे साफ है कि वहां खनन करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही थी।
सत्तारूढ़ भाजपा के ही सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह ने शनिवार को आरोप लगाए थे कि डाडम में अवैध खनन किया जा रहा है। 800 से 900 फुट की गहराई तक खनन किया गया और जमीन में नीचे से पानी निकला हुआ है। पहाड़ खिसकने का कारण भी उन्होंने अवैध खनन को ही बताया था और मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
जांच के दौरान कमेटी इस बात का भी पूरा ध्यान रखेगी कि वहां काम करने वाले लोगों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। इसके अलावा हर पहलु की बारीकि से जांच की जाएगी।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट बीआर मीणा ने बताया कि शिला को तोड़ने के लिए ब्लास्ट किए गए थे, मगर अब तक वह टूटी नहीं है। अब फिर से ड्रिल कर चार्जिंग के बाद ब्लास्ट किए जाएंगे। मगर नियमों के अनुसार रात को ब्लास्ट नहीं कर सकते, इसलिए ब्लास्ट सुबह किए जाएंगे। हालांकि रात को भी बचाव कार्य लगातार जारी रहेगा।
एनडीआरएफ गाजियाबाद टीम के अनुसार करीब 40 बाई 30 फीट की भारी भरकम शिला नीचे गिरी हुई है। उस चट्टान को ड्रिल किया जा रहा है। तीन चार जगह से ड्रिल होने बाद ही चट्टान को ब्लास्ट किया जाएगा। पांच से दस लोगों को एक साथ बचाव कार्य के लिए भेजा जा रहा है। हर दो-दो घंटे में शिफ्ट के साथ बचाव दल के लोगों को चेंज कर दिया जाता है। बचाव कार्य में जाने वाले लोगों का पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
राहत कार्य में एनडीआरएफ के 42 और एसडीआरएफ के 31 जवान तैनात किए गए हैं। 100 जवान हिसार आर्मी कैंप से आए हुए हैं। इसके अलावा हरियाणा पुलिस के भी 100 जवान घटनास्थल पर बचाव कार्य में मदद के लिए तैनात किए गए हैं। डाडम में कुल 250 से भी अधिक जवान बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।
बचाव कार्य के दौरान चिकित्सकों की टीम भी रात भर मौजूद रही। स्वास्थ्य विभाग से तीन एंबुलेंस रात को घटनास्थल पर रहीं। इनमें एक एंबुलेंस वेंटिलेटर युक्त थी। चिकित्सकों में डॉ. पुनीत ग्रोवर, डॉ. दिनेश कुमार की टीम मौजूद रही। वहीं दूसरी ओर फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां भी मौजूद रहीं। रविवार रात को भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी और एंबुलेंस मौके पर ही रही।
बचाव कार्य के दौरान बिजली निगम से कार्यकारी अभियंता संजय रंगा और कुलदीप मोर को एनडीआरएफ की टीम के साथ कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। बचाव कार्य के दौरान एसडीएम तोशाम रातभर खड़े रहे और अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जरूरी निर्देश देते रहे। इस दौरान तहसीलदार रविंद्र मलिक, नायब तहसीलदार अशोक सांखला, ड्यूटी मजिस्ट्रेट बीडीपीओ रविंद्र दलाल व जिला सीआईडी प्रभारी सुनील कुमार सहित संबंधित विभागों से अधिकारी मौजूद रहे।
किसान सभा, सीटू व कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को हादसे की जांच पड़ताल के लिए डाडम पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीटू के राज्य उपप्रधान कामरेड सतबीर सिंह कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डाडम और खानक क्षेत्र में राज्य सरकार की मिलीभगत से खनन माफिया अंधाधुंध खनन में लगा हुआ है, जिसका सुरक्षा उपायों पर कोई ध्यान नहीं है। उसी का परिणाम सह भयंकर दुर्घटना है। उन्होंने जिला प्रशासन ने अपील की है कि बचाव कार्य को तेज किया जाए, ताकि अंदर दबे श्रमिकों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके। उन्होंने सरकार से मृतकों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा व सरकारी रोजगार और घायलों को 25-25 लाख रुपये सहायता दी जाए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि खनन माफिया पर अंकुश लगाकर जनहित में नीति बनाई जाए। प्रतिनिधिमंडल में किसान सभा के कामरेड ओमप्रकाश, सीटू जिला प्रधान राममेहर सिंह, हिसार के सीटू प्रधान सुरेश कुमार, सीटू नेता सुखेदव पालवास, मजदूर नेता सदीक डाडम व राजेंद्र मील दुर्जनपुर शामिल थे।
खनन करने वाली कंपनी गोवर्धन माइंस के माइनिंग मैनेजर संजय सिन्हा और सीईओ वेदपाल तंवर ने कहा कि कंपनी अपने नियमों के तहत खनन कर रही है। माइनिंग मैनेजर ने बताया कि जहां पर हादसा हुआ है उसके दोनों तरफ के पहाड़ वन विभाग के नियंत्रण में है। वहां पर कोई भी खनन कार्य नहीं हो रहा है, बल्कि कंपनी ने अपने हिस्से की भी कुछ क्षेत्र वन विभाग के लिए छोड़ रखा है, पिछले करीबन दो माह से खनन कार्य पूरी तरह से बंद था एक जनवरी को ही खनन कार्य की शुरुआत होनी थी। खनन की शुरुआत होने से पहले ही वन विभाग की तरफ की पहाड़ी से एक हिस्सा दरककर गिर गया। कंपनी पूरे नियमों के तहत खनन कार्य कर रही है। वेदपाल तंवर ने बताया कि कंपनी हादसे में मरने वाले मजदूरों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख सहायता राशि के तौर पर देगी।
मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। जांच में सभी पहलुओं पर नजर रखी जाएगी। जांच के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी उसी के आधार पर मामले में आगे संज्ञान लिया जाएगा। - अजीत सिंह शेखावत, एसपी भिवानी।