भिवानी। रोडवेज हड़ताल के दौरान जेल गए कर्मचारी नेताओं ने छूटने के बाद पुलिस प्रशासन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। शनिवार को कर्मचारियों के बीच पहुंचे कर्मचारी नेताओं ने कहा कि प्रशासन ने जेल में कुख्यात अपराधियों की तरह प्रताड़ित किया, इतना ही नहीं महिला कर्मचारी नेताओं से तो शौचालय भी साफ कराए । कर्मचारी नेताओं ने डीसी, एसपी के तबादले की मांग करते हुए प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
उल्लेखनीय है कि 31 अक्तूबर को रोडवेज के हड़ताली कर्मचारियों ने बस स्टैंड का घेराव किया था। स्टैंड से बस निकालने पर कर्मचारियों की तरफ से बसों पर पथराव किया गया था। पुलिस ने 16 कर्मचारी नेताओं पर हत्या का प्रयास समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए। कुछ नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। जेल से छूटने के बाद प्रेस वार्ता करते हुए सर्व कर्मचारी संघ कार्यालय के प्रदेशाध्यक्ष धर्मबीर फौगाट, महासचिव सुभाष लांबा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया। कर्मचारी नेताओं को थाने में टॉर्चर किया गया। कर्मचारियों पर ऐसी धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए जैसे कुख्यात अपराधियों पर दर्ज होते है। प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए डीसी व एसपी के तबादले की मांग की। उन्होंने कहा कि कल रोहतक में प्रदेश स्तरीय बैठक कर भिवानी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी ने बसों पर पथराव नहीं किया और प्रशासन ने पथराव का बहाना बनाकर कर्मचारियों को प्रताड़ित किया है।
राष्ट्रपति व महिला आयोग को करेंगे शिकायत : बिमला घणघस
जनवादी महिला समिति के अध्यक्ष बिमला घणघस ने आरोप लगाया कि धरने के बाद घर जाने के दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। आरोप यह भी है कि जज ने भी आंख बंद कर हस्ताक्षर किए और जेल जाने के बाद प्रशासन के दबाव में उनसे शौचालय तक साफ करवाए गए। उन्होंने कहा कि वो इस बारे में राष्ट्रपति के साथ महिला आयोग को शिकायत करेंगी।
150 करोड़ का घाटा, 144 करोड़ में आ जाती बसें
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव सुभाष लांबा ने कहा कि हड़ताल के दौरान करीब 150 करोड़ रुपये नुकसान की बात कही जा रही है जबकि 700 बसें तो सरकार 144 करोड़ रुपये में ही खरीद सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कोर्ट द्वारा यथा स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे, जबकि सरकार ने इसके बाद भी 190 बसों के टेंडर जारी कर दिए। लांबा ने कहा कि कोर्ट ने 14 नवंबर तक सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के भी निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार टकराव चाहती है।