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- जज सौरभ गुप्ता की कोर्ट ने सुनाई सजा, सबूतों के अभाव में तीन को किया बरी

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तोशाम। तोशाम कस्बे के एक व्यापारी को ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने के मामले में महिला व एएसआई को न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की कोर्ट ने दोषी करार देते हुए साढ़े पांच साल की सजा सुनाई है। वहीं सबूतों के अभाव में तीन को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने पुलिस अधिकारी द्वारा अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किए जाने पर कड़ा संज्ञान लिया है।
तोशाम कस्बे के व्यापारी ने दिसंबर 2013 में पुलिस को शिकायत दी थी कि एक महिला ने हिसार में मकान बनाने की बात कहकर सीमेंट के बारे में बात की थी। व्यापारी ने महिला को हिसार से ही सीमेंट खरीदने की सलाह दी। इसके बाद 2-3 बार महिला के फोन आए और हिसार आने को कहा। हिसार के लिए मना किए जाने पर भिवानी बुलाया। व्यापारी ने बताया कि भिवानी पहुंचने पर चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाकर महिला कमरे में ले गई। कमरे में पहले से ही पुलिस वाला वर्दी में छुपा बैठा था जिसने मुझे पकड़ लिया और दो लाख रुपये की मांग की और नहीं देने की स्थिति में अंदर करने की धमकी दी गई। व्यापारी ने मामले में बदनामी के डर से दो लाख रुपये दे दिये। तभी दोनों की मिलीभगत होने का शक हुआ। इसके बाद फरवरी 2015 में दुकान पर एक एएसआई शमशेर सिंह आया और कहा कि जिस औरत से आप मिले थे उनका पति मर गया है और सुसाइड नोट में आपका नाम लिख गया है। आप फंस जाएंगे। व्यापारी ने आरोपियों को सात लाख रुपये दे दिए। उसके बाद उसने पुलिस को शिकायत दी। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था।
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इसी मामले में न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने जिला हिसार निवासी पुलिस एएसआई शमशेर व सिवानी निवासी महिला कृष्णा को सजा सुनाई है। अदालत ने धारा 388 के तहत तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है। धारा 420 में दो साल की सजा व चार हजार रुपये जुर्माना और 120बी में 6 माह की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जज सौरभ गुप्ता ने सभी सजा अलग-अलग काटने का फैसला सुनाया है। वहीं, मामले में फतेहाबाद निवासी कृष्ण, हिसार निवासी कुलदीप व हिसार जिले से ही रमेश कुमार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने पुलिस अधिकारी द्वारा ताकत का गलत इस्तेमाल कर जुर्म किए जाने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया। अदालत ने पुलिस विभाग को भी पत्र लिखते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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