गांव में कैंसर के मरीज बढ़े तो जहर मुक्त खेती के लिए चलाया जागरूकता अभियान
रविंद्र श्योराण
भिवानी। सेवा सुरक्षा सहयोग के ना जाने ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जिनकी हर तरफ प्रशंसा होती है। इसी तरह पुलिस विभाग में एक चेहरा ऐसा भी जो सेवा सुरक्षा सहयोग के साथ किसानों के लिए भी पूरी तरह से समर्पित है। पुलिस विभाग से मिलने वाले मेहताना से वह 75 फीसदी खर्च कर जहर मुक्त खेती करने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है। खांडा खेड़ी के रहने वाले विक्रम सिंधु, जो भिवानी पुलिस लाइन में छोटा मुंशी के पद पर तैनात है। सिंधु के गांव में वर्ष 2013 में एक बाद एक को कैंसर की बीमारी ने इस तरह आहत कर दिया कि वे जहर मुक्त खेेेती के लिए किसानों को जागरूक करने की ठान ली। इसके पीछे कारण था कि फसल पैदा करने के लिए प्रयोग होने वाले रासायनिक खाद का प्रयोग किया जाना। उसने उसी दिन ठान ली कि वह किसानों को जहर मुक्त खेती करने के लिए जागरूक करेंगे। किसानों को जागरूक करने के लिए उसने अपने खेत में प्रशिक्षण केंद्र भी बनाया हुआ है। इसके लिए कई बार सम्मानित हो चुके हैं।
डिस्क प्रॉब्लम के बाद भी नहीं मानी हार
विक्रम सिंधू पुलिस में अपनी सेवा देने के साथ किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं। विक्रम स्वयं डिस्क प्रॉब्लम से ग्रस्ति हैं। इस बीमारी के चलते व्यक्ति के पैर सुन्न होने लगते हैं। डिस्क प्रोब्लम होने के बाद भी वह लगातार किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाते रहते हैं। विक्रम ने वाट्सएप पर जहर मुक्त खेती के नाम से ग्रुप बनाया और उसमें किसानों को जोड़ना शुरू कर दिया। ग्रुप के माध्यम से वे जैविक खेती करने का प्रशिक्षण देते है। उनके ग्रुप में हरियाणा के साथ राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के एक हजार के करीब किसान जुड़े हुये हैं।
खांडा खेड़ी में देते हैं दो रुपये में आरओ का 15 लीटर पानी
पीने के पानी की समस्या को देखते हुए विक्रम ने गांव में आरओ प्लांट लगाया हुआ है। विक्रम किसानों को मात्र दो रुपये में 15 लीटर आरओ का पानी देते हैं। उन्होंने आरओ प्लांट अपनी कमाई के पैसों से लगाया है।
एग्री समिट में करते हैं किसानों को जागरूक
विक्रम जब भी हरियाणा में एग्री समिट लगता है तो वहां पर अपनी टीम के साथ पहुंच जाते हैं। वहां पर वे आने वाले किसानों को जहर मुक्त खेती करने व जैविक खेती के लिए जानकारी देते है। वे उन्हें जहरीली खेती से होने वाली भयंकर बीमारियों के बारे में भी जानकारी देते हैं। इसके लिए उन्हें एग्रीम समिट में भी सम्मानित किया जा चुका है।