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छह दिन से नहीं हो रही अस्पताल में सफाई

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ठेकेदार का ठेका खत्म, सामान्य अस्पताल में लगे गंदगी के ढेर, मरीज और परिजन दुर्गंध से बेहाल
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल में पुराने ठेका खत्म हुए छह दिन हो चुके हैं और ठेकेदार के कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है। वहीं नए ठेका वर्क ऑर्डर नहीं मिलने के कारण अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। शौचालयों की सफाई नहीं होने से वार्डों में दुर्गंध फैली हुई है तो जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। सामान्य अस्पताल परिसर में बने पार्कों में कचरे के ढेर लग गए हैं। लोग अस्पताल परिसर और वार्डों में कोनों कचरा डाल रहे हैं।
सामान्य अस्पताल में सफाई व्यवस्था, सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पिछले वर्ष ठेका दिया गया था। ठेकेदार को 178 कर्मचारी लगाने थे। ठेकेदार का ठेका 31 मई को खत्म हो चुका है। उससे पहले ही 23 मई को नया ठेका देने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी मगर यह फाइल अब डीजी कार्यालय में फंसी है। ठेकेदार को वर्क ऑर्डर नहीं हो रहे हैं। ऐसे में अस्पताल की सफाई व्यवस्था बिल्कुल ठप हो गई। पिछले छह दिन से अस्पताल में कोई सफाई नहीं हुई है।
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बीमारियों का खतरा, मरीज वार्डों से बाहर
सामान्य अस्पताल के वार्डों की हालत इतनी खस्ता बनी हुई है कि शौचालयों की दुर्गंध के कारण खड़े होना भी मुश्किल है। शौचालयों में सफाई नहीं हो रही। पानी नहीं होने के कारण शौचालयों से दुर्गंध आ रही है। ऐसे में मरीज वार्डों में कम बाहर ज्यादा नजर आ रहे है। मरीजों और उनके साथ आए तीमानदारों को और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।
क्या कहते हैं मरीज
बुखार की वजह से पांच दिन से यहां भर्ती हूं। यहां सफाई व्यवस्था बिल्कुल शून्य है। शौचालय की दुर्गंध से बेड पर रहा ही नहीं जाता। यहां तो और ज्यादा तबीयत बिगड़ जाएगी।
- अशोक कुमार, मरीज
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हाथ में चोट के कारण वार्ड छह में भर्ती हुआ था। मगर यहां सफाई व्यवस्था बदहाल है। शौचालय में पानी ही नहीं है। जिस कारण लोग शौच और पेशाब तो जाते हैं मगर पानी नहीं डाल पाते। ऐसे में दुर्गंध से बुरा हाल है।
- परमजीत, मरीज चरखी दादरी
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मेरा बेटा नीकू वार्ड में भर्ती है। यहां पानी नहीं है। सफाई व्यवस्था ही नहीं है। हालात ये है कि हमें स्वयं ही कचरा बाहर फेंकना पड़ रहा है। बाहर भी कूड़ादान नहीं है।
बिमला, मरीज परिजन, जमालपुर
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असप्ताल में पानी नहीं है। पानी पीने के लिए या तो खरीदकर लाओ या बाहर हैडपंप से। डाक्टर साफ सफाई का ध्यान रखने, शुद्ध पानी पीने को बोल रहे हैं जबकि यहां सफाई ही नहीं हो रही। पीने का पानी तो दूर हाथ धोने तक को पानी नहीं है।
-सुनीता, मरीज परिजन, बाढड़ा

अस्पताल परिसर में बेहतर जरूरी है सफाई
अस्पताल परिसर खासकर वार्डों में सफाई व्यवस्था बेहतर होना जरूरी है। अन्यथा यहां बीमारियों का खतरा बना रहता है। नियमानुसार दिन में दो बार शौचालयों की सफाई, पूरे फर्श पर एंटी बैक्टिरिया दवा मिलाकर साफ करना जरूरी है। दुर्गंध तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ताकि मरीज को बेहतर माहौल उपलब्ध करवाया जा सके। मगर अस्पताल में स्थिति बिल्कुल विपरीत है।
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पुराना ठेका 30 मई को खत्म हो चुका है और नए ठेके के अभी वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुए है। डीजी हेल्थ को फाइल भेजी हुई है और एक-दो दिन में वर्कऑर्डर मिल जाएगा। जिसके बाद सफाई व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। वार्डों के शौचालयों में पानी की दिक्कत की सूचना है। इस बारे में डीसी कार्यालय और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर पानी की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
- डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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