भिवानी। भगत सिंह, सुखदेव और राज गुरु के शहीदी दिवस पर बुधवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से फ्रीडम ब्लड बैंक और श्रीपालेराम चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग फ्रीडम ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर लगाया। 55 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
करीब पांच घंटे तक चले शिविर में महिला शक्ति भी पीछे नहीं रही। भाजपा नेत्री मीना परमार समेत चार महिलाओं ने रक्तदान किया। 18 बार रक्तदान कर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनीं भानगढ़ प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका प्रमिला जांगड़ा ने सभी रक्तदाताओं को सम्मानित किया।
105 बार रक्तदान करने वाले राजेश डुडेजा, रक्तवीर मनीष वर्मा ने भी रक्तदाताओं को सम्मानित किया और शिविर में विशेष सहयोग दिया। फ्रीडम ब्लड बैंक से डॉ. मंदीप पंघाल, उड़ान वेलफेयर सोसायटी से मास्टर पवन, गो सेवक शंकर खरबंदा, वार्ड नंबर 31 से सुनील कुमार, विकास आर्य ने भी अपनी सेवाएं दीं।
तीन महिलाओं ने अपने पति के साथ किया रक्तदान
शिविर म चार महिलाएं रक्तदान के लिए पहुंचीं। खास बात रही कि तीन महिलाओं ने अपने पति संग रक्तदान किया। इनमें भाजपा महिला नेत्री मीना परमार ने अपने पति अर्जुन के साथ, शिक्षिका कल्पना ने अपने पति रामकिशन के साथ और गृहिणी अनीता ने अपने पति नवीन के साथ रक्तदान किया। इसके अलावा किरावड़ गांव से महिला उर्वशी ने भी रक्तदान किया। भाजपा नेत्री मीना परमार, गृहिणी अनीता, इंश्योरेंस कंपनी से कर्मचारी उर्वशी ने पहली बार रक्तदान किया, जबकि शिक्षिका कल्पना ने छठी बार रक्तदान किया।
इन्होंने किया रक्तदान
शिविर में साधुराम, सतीश, किरण कुनाल, सुनील, दीपक वर्मा, दिग्विजय, शिवपाल, दीपक, राजेश कुमार, प्रवीण, कुलदीप, सुधीर, जितेंद्र, मोहिन खान, सुरेंद्र कुमार, अमित, प्रदीप, अश्विनी, बृजेश, प्रदीप, दिनेश, मुकेश, रमेश कुमार, प्रवीण, राज कुमार, दीपक, अधिवक्ता मुकेश गुलिया, अमित शर्मा, अतुल, सत्यजीत, नवीन, अनीता, मोनू, सिवानी थाने से हवलदार देवीलाल, मोनू प्रताप, विरेंद्र, शक्ति सिंह, विकास आर्य, राजकुमार, हरेंद्र, अजय, अर्जुन, मीना परमार, रामकृष्ण, कल्पना, जितेंद्र सैनी, राज सिंह, विकास, अजय, मंजीत, अमित, उर्वशी ने रक्तदान किया।
मैंने सातवीं बार रक्तदान किया है। जरूरतमंद की जिंदगी को बचाने के लिए रक्त बहुत ज्यादा जरूरी होता है। इसलिए सभी स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए।
- साधुराम, पुराना हाउसिंग बोर्ड।
वर्ष 1997 में दोस्त की पत्नी की डिलिवरी हुई थी। उस दौरान पहली बार रक्तदान किया था। अब तक 49 बार रक्तदान कर चुका हूं। दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान किया है तो काफी अच्छा महसूस हो रहा है।
- सतीश कुमार, ढाणा लाडनपुर।
वर्ष 2015 से रक्तदान कर रहा हूं। अब तक पांच बार रक्तदान किया है। रक्तदान करना सेहत के लिए काफी लाभदायक है और दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए आवश्यक भी है।
- किरण कुमार यादव, डीसी कॉलोनी।
करीब 20 साल पहले रक्तदान शुरू किया था, जिसके बाद अब तक 52 बार रक्तदान कर चुका हूं। रक्तदान के लिए पंजाबी सिंगर गुरदास मान से समय-समय पर प्रेरणा मिलती रहती है। इसके साथ ही सभी से अपील है कि रक्तदान जरूर करें।
- दीपक वर्मा, कृष्णा कॉलोनी।
करीब दो साल पहले एक मरीज को रक्त की जरूरत थी, तब रक्तदान किया था। अब अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित शिविर में दूसरी बार रक्तदान किया है। प्रत्येक नागरिक को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए।
- बिजेंद्र, नांगल।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित शिविर में पहली बार रक्तदान किया है। रक्तदान करना पुण्य का काम है तो जरूरतमंद की सहायता के लिए रक्तदान करें।
- जगप्रवेश, जेई बिजली निगम।
भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए अपनी जान तक दे दी। ऐसे महान क्रांतिकारियों से प्रेरणा लेते हुए हम सभी को जरूरतमंदों की मदद के लिए रक्तदान करना चाहिए। मैंने आज 14वीं बार रक्तदान किया है।
- जितेंद्र धारीवाल, मिताथल।
वर्ष 1997 में दोस्त की बहन का ऑपरेशन हुआ था, उस दौरान भाई के साथ पहली बार रक्तदान किया था। अब तक 28 बार रक्तदान कर चुका हूं। रक्तदान के साथ ही लोगों को रक्तदान करने के लिए भी जागरूक करते हैं। रक्तदान से आत्मिक शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
- एडवोकेट मुकेश गुलिया, बैंक कॉलोनी।
परिजनों से छिपकर करती थीं रक्तदान, आज महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
राजकीय प्राथमिक पाठशाला के कार्यरत अध्यापिका प्रमिला जांगड़ा अब तक 18 बार रक्तदान कर चुकी है। कभी परिजनों के डर से छिपकर रक्तदान करने वाली प्रमिला जांगड़ा आज महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं और वे महिलाओं को रक्तदान के लिए जागरूक भी करती हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में पहली बार रक्तदान किया था। उस दौरान परिवार वालों ने रक्तदान करने से काफी बार मना किया था। परिजनों ने उनकी सेहत का डर सता रहा था, मगर उन्होंने परिजनों को रक्तदान के प्रति जागरूक किया। उसके बाद पूरे परिवार ने रक्तदान शुरू कर दिया। उनके पति दलीप सिंह भी अध्यापक हैं, जिन्होंने पांच बार रक्दान किया है।