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हड़ताल कर रहे एनएचएम के 15 कर्मचारियों को भेजे टर्मिनेट के ऑर्डर, प्रतियां फूंक कर्मचारियों ने जताया विरोध

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भिवानी। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल को समाप्त कराने के लिए प्रदेश सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों के टर्मिनेशन यानी सेवा समाप्ति के आदेश पत्र भेज दिए। विरोध में कर्मचारियों ने सरकार द्वारा भेजे गए आदेश की प्रतियां जलाई। इससे पहले एनएचएम कर्मचारियों ने शहर में विरोध प्रदर्शन किया। लगातार चौथे दिन एनएचएम के 400 से अधिक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते चौथे दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई। ना तो डिलीवरी केसों के लिए महिलाओं को लेने के लिए कोई एंबुलेंस गई और ना ही जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने एंबुलेंस गई। नीकू वार्ड भी प्रभावित नजर आया। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों सीएचसी, पीएचसी पर भी व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित नजर आई।
बता दें कि एनएचएम कर्मचारी पिछले चार दिन से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे है। हड़ताली 13 कर्मचारियों को टर्मिनेट करने के आदेश सरकार ने जारी किए हैं। वहीं हड़ताल के तहत एनएचएम कर्मचारी अस्पताल परिसर में बने पार्क में एकत्रित हुए। यहां रोष सभा कर एनएचएम के तहत लगे कर्मचारियों को नियमित करने और रोजगार की सिक्योरिटी देने की मांग की। रोष सभा करने के बाद सभी जुलूस के रूप में घंटाघर चौक पर पहुंचे। यहां टर्मिनेट के आदेशों की प्रतियां जलाई।
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हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान प्रदीप कुमार, उपप्रधान मंजू रानी व सुधीर भारद्वाज ने कहा कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग हड़ताल को कमजोर करने के लिए एनएचएम संगठन के पदाधिकारियों को बर्खास्तगी के आदेश पत्र जारी कर रहा है। इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा, जब तक सभी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जाता और जॉब सिक्योरिटी नहीं दी जाती तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने स्वास्थ्य निदेशालय से भेजे गए टर्मिनेट ऑर्डर की प्रतियां जलाकर इसका विरोध जताया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मानती तब तक वे इसी तरह हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार दमन के जरिये हड़ताल खत्म कराने का प्रयास करती है तो वे अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
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बता दें कि प्रदेशभर में करीबन साढ़े 13 हजार एनएचएम कर्मचारी नियमित किए जाने व जॉब सिक्योरिटी की मांग को लेकर लगातार चार दिनों से हड़ताल पर चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में 90 फीसदी सेवाएं एनएचएम पर कंधों पर ही टिकी हुई है। ऐसे में इनकी हड़ताल ज्यादा दिन तक चलती है तो स्वास्थ्य सेवाएं भी डगमगा जाएंगी और लोगों की सेहत पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।
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