अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
शहर वासियों को लावारिस पशुओं को निजात दिलाने के लिए तैयार की गई नंदीशाला 128 लावारिस पशुओं से ही फुल हो गई है। दो एकड़ में बनी नंदीशाला में इन्हें रखना मुश्किल हो गया है। जानकारों का कहना है कि इससे ज्यादा सांड इस जगह में नहीं रखे जा सकते। इस वजह से करीब 15 दिन से लावारिस पशु पकड़ो अभियान थमा हुआ है। नंदीशाला की चारदीवार भी दो जगह से टूटने लगी है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी यहां पर अभी कुछ और लावारिस पशु रखने की बात कह रहे हैं। इसके लिए नंदीशाला के साथ ही मत्स्य पालन विभाग की जगह पर एक अन्य टिन शेड लगाने की तैयार होने लगी है।
लावारिस पशु शहर वासियों के लिए आफत बने हुए है। परेशान लोगों ने कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, तो कोर्ट ने एक महीने में लावारिस पशुओं को गोशाला पहुंचाने के निर्देश दे दिए। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। शहर वासियों को इस परेशानी से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने दो एकड़ में नंदीशाला बनाई। प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया कि 30 जुलाई तक शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त कर दिया जाएगा। अभियान के तहत लावारिस पशुओं को पकड़कर नंदीशाला पहुंचाया जाने लगा। शहरभर से 128 लावारिस पशु पकड़कर नंदीशाला में छोड़े गए और उसके बाद अभियान थम गया। बताया जा रहा है कि नंदीशाला में पशुओं की संख्या ज्यादा हो गई है। दरअसल, प्रशासनिक अधिकारी यहां पांच सौ से सात सौ लावारिस पशु रखने की प्लानिंग बना रहे थे, मगर जगह बमुश्किल 125 लावारिस पशुओं के लिए ही है। दो दिन पहले भी एसडीएम ने नंदीशाला का निरीक्षण किया था। उस वक्त कर्मचारियों ने उन्हें बताया था कि यहां अब और लावारिस पशु नहीं रखे जा सकते।
जल्द बनेगा एक और टिन शेड
पूर्व मंत्री और विधायक घनश्याम सर्राफ की घोषणा के अनुसार मत्स्य पालन विभाग की जगह में एक और टीन शेड तैयार किया जाएगा। नप अधिकारियों की माने तो जल्द ही निर्माण शुरू होगा। इसे 10 से 15 दिन में ही तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद शहर के लावारिस पशुओं को यहां रखा जा सकेगा।
नंदीशाला में दो सांडों की मौत
महज दो एकड़ में बनाई गई नंदीशाला में लड़ने के दौरान सोमवार को दो सांड़ बुरी तरह जख्मी हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई। मृत सांडों को मत्स्य पालन विभाग की जगह में दफनाया गया है।
चारदीवार भी लगी टूटने
सांडों को नंदीशाला में रोके रखने के लिए बनाई चारदीवारी शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है। चारदीवारी सांडों के लिहाज से कमजोर है। शनिवार और रविवार को हुई सांड़ों की लड़ाई के कारण चारदीवार दो जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। विशेषज्ञों की माने तो नंदीशाला के लिए कम से कम 14 इंची की चारदीवारी होनी चाहिए। पिछले दिनों चंडीगढ़ के विशेषज्ञों की टीम ने नंदीशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने नंदीशाला में बनाई चारदीवारी, पानी और चारा डालने की जगह के निर्माण पर सवाल उठाए थे।
बढ़ रहे लावारिस पशु
शहर में लावारिस पशुओं की बढ़ती जा रही है। दरअसल शहर में नंदीशाला के निर्माण की सूचना के बाद अब आसपास के गांवों के ग्रामीण रात में लावारिस पशुओं को शहर में छोड़ जाते है। इस वजह से संख्या बढ़ती जा रही है।
नंदीशाला में सांड़ों की संख्या बढ़ने के कारण अभियान रोका गया है। जल्द ही यह दोबारा शुरू होगा। नंदीशाला में फिलहाल करीब 128 सांड है। इसमें कुछ और रखने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा पीछे एक और टिन शेड का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। गांवों से लोग लावारिस पशुओं को शहर में छोड़ रहे है। इस कारण समस्या है। गांवों में नंदीशालाएं शुरू होने के बाद समस्या पर पूरी तरह काबू किया जा सकेगा।
सुंदर सिंह, एमई
नगर परिषद