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19 फीसदी नौनिहालों पर बीमारियों का खतरा

Wed, 26 Aug 2015 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/भिवानी
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19 फीसदी नौनिहालों पर खसरा, पोलियो व अन्य बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। हरेक बच्चे को बीमारियों से मुक्त बनाने का स्वास्थ्य विभाग का अभियान पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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वहीं अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे। स्वास्थ्य विभाग ने 28 हजार बच्चों का सर्वे किया जिसमें पाया कि 19 फीसदी बच्चों को एक साल के बाद लगने वाले टीके नहीं लग रहे।

स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर पोलियो, खसरा व अन्य बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाता है। अभियान कितने सार्थक साबित हुए, इसके लिए पिछले दिनों सर्वे करवाया गया।
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सर्वे में सामने आया कि बच्चे के जन्म के साथ तो टीकाकरण हो रहा है मगर एक साल के बाद लगने वाले टीकों से बच्चें छूट रहे है। करीब 86 फीसदी बच्चों को ही एक साल के बाद लगने वाले पोलियो, खसरा व अन्य बीमारियों के टीके लग रहे है बाकी 19 फीसदी बच्चों पर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।

विभाग ने सर्वें में करीब 28 हजार बच्चों को शामिल किया। यह तो स्वास्थ्य विभाग का सर्वे है। अगर डब्ल्यूएचओ (वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) के सर्वे की बात की जाए तो 19 फीसदी बच्चों को बीमारियों की सुरक्षा के टीके नहीं लग रहे। अब स्वास्थ्य विभाग ने बचे हुए बच्चों को

भ्रांति के कारण नहीं लगवा रहे टीकें
पिछड़े क्षेत्रों के लोगों के मन में आज भी भ्रांति है कि इंजेक्शन लगवाने से बच्चों को बीमारियां लग जाती हैं। जिससे बच्चे की जान भी जा सकती है। इसी भ्रांति के कारण लोग टीके नहीं लगवा रहे।


पेंटाविलेंट है अहम
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को पांच बड़ी बीमारियों गलघोंटू, काली खांसी, टीटी, हेपेटाइटिस बी, दीमागी बुखार से बचाने के लिए एक ही टीका पेंटाविलेंट बी बनाया। यह बच्चों के लिए अहम है।


2013 के सर्वे में 39 फीसदी बच्चे थे वंचित
स्वास्थ्य विभाग के 2013 में हुए सर्वे में करीब 39 फीसदी बच्चे बीमारियों के सुरक्षा वाले टीकों से वंचित थे। बच्चों को जन्म के समय तो सुरक्षा टीके लग रहे हैं मगर उसके बाद बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।


गरीब बच्चों की सुरक्षा पर खतरा
सर्वे में सामने आया कि भिवानी में खासी संख्या में झुग्गी-झोपड़ियां हैं। करीब तीन सौ भट्ठे हैं। भ_ों व झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले परिवारों के बच्चों को सुरक्षा टीके नहीं लग रहे। टीकों से वंचित बच्चों में अधिकतर इन्हीं परिवारों से संबंधित हैं।




कब-कब कौन-कौन से लगते है टीके
समय    टीकाकारण
* जन्म से डेढ़ माह तक: बीसीजी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी
* डेढ़ माह पर: पेंटाविलेंट वन
* ढाई माह पर: पोलियो, हेपेटाइटिस बी, पेंटाविलेंट टू
* साढ़े तीन माह पर:    पेंटाविलेंट तीन
* नौ से 12 माह पर    खसरा वन, जेई
* 16 से 24 माह पर    डीपीटी बूस्टर, खसरा द्वितीय, जेई द्वितीय
* पांच से छह वर्ष पर: डीपीटी बूस्टर, खसरा


वर्जन:::
हमारा प्रयास है कि हर बच्चे को बीमारियों से सुरक्षा के टीके लगे। भट्ठों और झुग्गी झोपड़ियों के परिवारों का एक जिले या प्रदेश से दूसरी जगह आना-जाना लगा रहता है। इस कारण बच्चे छूट जाते हैं। इस बार भी भट्ठों और झुग्गी झोपड़ियों पर फोकस किया गया है।
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डा. रमेश धनखड़, सिविल सर्जन


फोटो 01
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