अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिला बाल कल्याण परिषद की जमीन आवंटन मामले में हाईकोर्ट ने एग्ज्क्यिूटिव कमेटी में शामिल 17 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट द्वारा जारी किया गया यह नोटिस बाल भवन जमीन में 11 शोरूम अलॉटमेंट मामले में एग्रीमेंट देने के बावजूद रद्द किए जाने के मामले को पीड़ित पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में चुनौती देने के बाद दिया है।
शुरुआत से ही विवादों में घिरे बाल भवन जमीन आवंटन का यह मामला उस अलाटमेंट की प्रक्रिया को पूरा किए बगैर ही 11 शोरूम निर्माण कर दिए गए और निर्धारित शुल्क जमा कराने के बाद अलाटियों को बाकायदा एग्रीमेंट भी दिया गया। इसी मामले में आवंटन रद्द होने के बाद शोरूम अलाट होने वाले पीड़ित लोगों ने हाई कोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए भिवानी जिला प्रशासन की ओर से गठित की गई एग्जिक्यूटिव कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इस कमेटी में जिला उपायुक्त सहित विभिन्न विभागों के 17 अधिकारी शामिल हैं।
मामले के अनुसार जिला बाल भवन परिसर में जिला बाल कल्याण परिषद की जमीन में 11 शोरूम निर्माण एवं स्वीमिंग पुल निर्माण के लिए एग्रीमेंट किया गया। लगभग 900 वर्ग फीट के 11 प्लॉट जिसकी कुल मार्केट कीमत लगभग 22 करोड़ रुपये आंकी जा रही थी, उसको 10 लाख की सिक्योरिटी राशि (यानि की कुल 1.1 करोड़) और लगभग 5800 रुपये प्रति माह किराए जमीन तल, 3200 रुपये प्रथम तल पर लंबी लीज पर आवंटन किया गया था। स्विमिंग पूल के लिए बड़ा प्लॉट लगभग 50,000 रुपये के सालाना किराये पर लंबी लीज पर आवंटन किया गया था। आनन-फानन में अधिकारियों ने 30 मार्च को प्लॉट (जमीन) आवंटन को अचानक ही रद्द करते हुए अलॉटियों को रजिस्टर्ड डाक के जरिये सूचना भेजी गई। अलाटमेंट रद्द होने की सूचना जैसे ही अलाटियों को मिली तो उन्होंने इस मामले को हाई कोर्ट में ले जाने का फैसला लिया। जिला बाल कल्याण परिषद जमीन में प्लाट अलॉटियों ने 17 मई 2018 को केस डाला। इसी मामले में हाई कोर्ट ने चार जुलाई को सुनवाई करते हुए भिवानी जिला प्रशासन द्वारा जमीन आवंटन के लिए गठित की गई एग्जिक्यूटिव कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
10 दिसंबर को देना होगा जवाब
बाल भवन परिसर में जिला बाल कल्याण परिषद द्वारा प्लाट आवंटन मामले की हाई कोर्ट में शिकायत करने वाले ने बताया कि जिला प्रशासन ने उसको बाल कल्याण परिषद की भूमि पर शोरूम अलाट किया था। इसके लिए उसने करीबन साढ़े तीन लाख रूपये की पहली किस्त चेक के माध्यम से जमा करा दी थी, जिसकी रसीद भी दी गई और प्लाट आवंटन के दस्तावेज भी उसे दिए गए थे। उसे दस लाख रुपये बतौर सिक्योरिटी जमा कराने थे। लेकिन दो दिन बाद ही उसे रजिस्टर्ड डाक से सूचना मिली कि आवंटन रद्द कर दिया गया है। इस मामले में उसने हाई कोर्ट की शरण ली, जिस पर एग्जिक्यूटिव कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है, जिसका जवाब हाई कोर्ट में 10 दिसंबर को देना होगा।
व्यापक स्तर पर हुई बंदरबांट और भ्रष्टाचार : बृजपाल
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि जिला बाल कल्याण परिषद की जमीन आवंटन में भारी धांधली एवं घपलेबाजी हुई थी। इसके सबूत भी उन्होंने आरटीआई के जरिए जुटा लिए थे, लेकिन अधिकारियों ने अपनी कारगुजारियों को छिपाने की नियत से ही आनन फानन में जमीन आवंटन मामला रद्द कर दिया था। पहले आवंटन और फिर इसे रद्द किए जाने से यह स्पष्ट हो गया था कि इस मामले में व्यापक स्तर पर बंदरबांट और भ्रष्टाचार हुआ है, इस मामले में वे भी उच्च न्यायालय में जाएंगे और एग्जिक्यूटिव कमेटी में शामिल सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच और भ्रष्टाचार करने वालों पर कार्रवाई की मांग करेंगे।