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जून की बारिश बनी आफत, 1840 लाख की कच्ची ईंटे हुईं बेकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी।
जून माह में हुई 100 एमएम से अधिक बारिश भट्ठा मालिकों के लिए आफत बन गई है। बारिश के कारण करीब 160 ईंट भट्ठों पर करीब 1840 लाख रुपये की कच्ची ईंटे खराब हो गई हैं। इतने बड़ा नुकसान होने भट्ठा मालिक की हालत खराब है। साथ ही मजदूर भी परेशान हैं। इतनी ईंटों के नुकसान होने का सीधा असर ईंटों के दामों पर पड़ रहा है। इनके दाम बढ़ने लगे हैं।
प्री-मानसून में उम्मीद से कहीं ज्यादा बारिश हुई है। इससे ईंट-भट्ठा संचालकों का कारोबार ठप सा हो गया है। जिलें में करीब पौने दो सौ भट्ठे है। इनमें से करीब 160 फिलहाल चालू हैं। अधिकतर भट्ठा मालिकों ने ईंटों की थपाई कर रखी थी। सभी ने बरसाती मौसम शुरू होने से पहले पकाई की तैयारी कर रखी थी। इस कारण मई में अधिक दाम पर लेबर लाकर ईंटों की थपाई कराई गई। तेजी से काम होने के कारण लगभग हर एक भट्ठे पर नौ से 10 लाख कच्ची ईंटें तैयार हो गई थीं। मगर, जून माह की बारिश ने सभी भट्ठा मालिकों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कच्ची ईंटें इस बारिश से पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
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एक अनुमान के अनुसार औसतन हर एक भट्ठे पर आठ से नौ लाख रुपये का नुकसान हुआ है। करीब 1840 लाख की ईंटे बारिश से खराब हुई हैं। इससे कई भट्ठा मालिक कर्जे में आ गए हैं।

बंद हो सकते है अनेक भट्ठे
पिछले दिनों दिल्ली में फैले अत्यधिक प्रदूषण के बाद सर्वे टीम ने पाया कि प्रदूषण के लिए ईंट-भट्ठे भी जिम्मेदार हैं। इसके बाद सभी भट्ठों के लिए नई तकनीक अपनाने के निर्देश दिए गए थे। नए निर्देशों के तहत जिगजैक हाई ड्राफ्ट भट्ठा सिस्टम लगाना होगा। इसके तहत भट्ठे में ही एक ऐसा सिस्टम लगाया जाएगा, जिसमें लगे पंखे से सिर्फ धुआं बाहर जाएगा, अन्य कार्बन कण नहीं। इस सिस्टम पर करीब 30 से 40 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च भट्ठा मालिकों को सहन करना होगा। जीएसटी की मार भी भट्ठा मालिकों पर पड़ी है। अब उन्हें पांच प्रतिशत जीएसटी देना होगा। ऐसे में सरकार के इन आदेशों और बारिश से हुए नुकसान के कारण अनेक भट्ठे बंद हो सकते हैं।

ईंट-भट्ठा मालिक रमेश टांक, धर्मबीर आदि ने बताया कि भट्ठा मालिकों को नए नियमों और कुदरत की मार के कारण जबरदस्त आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिगजैक हाई ड्राफ्ट भट्ठा बनाने के नियम, जीएसटी और कुदरत की मार से कर्जे में आ सकते हैं। सरकार को भट्ठा मालिकों को कुछ राहत देनी चाहिए।
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वर्जन
करीब एक महीने पहले ही हुई तेज बारिश से बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। कच्ची ईंटे पूरी तरह बेकार हो गई हैं। लागत, मजदूरी गई ही, ईंटों से आय की उम्मीद भी समाप्त हो गई है। हर एक भट्ठे पर बारिश से करीब सात से आठ लाख का नुकसान हुआ है। अब जिगजैक हाई ड्राफ्ट भट्ठों के भी निर्देश हो गए हैं। इसमें 30 से 40 लाख का अतिरिक्त खर्च होगा। सिस्टम लगाना होगा और भट्ठों के निर्माण में ही आठ से 10 लाख ईंटे लगेंगी।
वेद कुमार, प्रधान
ईंट-भट्ठा एसोसिएशन
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