आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
भिवानी। लघु सचिवालय के बाहर मंगलवार को दूसरे दिन भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। धरने पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग की। उन्होंने मांगे पूरी ना होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। धरने पर बैठी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर विरोध जताया।
लघु सचिवालय के बाहर मंगलवार को आंगनबाड़ी हेल्पर यूनियन की जिला प्रधान मूर्ति बिजराणिया की अध्यक्षता में धरना दिया। जिला प्रधान ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें अन्य विभागों में 2016 से लागू हो चुकी है, लेकिन हमें 2017 से मात्र 640 रूपये तथा 70 रुपये हेल्पर के मानदेय में बढ़ोतरी करके घोर भेदभाव किया गया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी के अलावा उनसे बीएलओ, संपूर्ण स्वच्छता अभियान, जनगणना, प्लस पोलियो, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की रैलियां निकालना, आर्थिक सर्वे तथा किसी भी प्रकार की सर्वे में उनसे मुफ्त में काम लेकर शोषण किया जा रहा है। कच्चा कर्मचारी संघ के जिला प्रधान नरदेव आर्य ने संघ की तरफ से आंगनबाड़ी वर्कर की मांगों का समर्थन किया। इस अवसर पर जिला सचिव सरोज चहल, उप प्रधान प्रेम लता, चंचल, सुहावती, मन्जू, प्रकाशो, सुमन, ओमपती, सविता, विद्या, अनिता, कमला, मंजू, शशी, भतेरी, गीता, कमलेश, नीलम, बिमला, सुमन, रीटा सहित बड़ी संख्या में हेल्परों व आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
दो साल से वेतन ना मिलने पर बालबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया रोष
भिवानी। बालवाड़ी कार्यकर्ताओं ने दो साल से वेतन न मिलने पर जिला मुख्यालयों के सामने धरना व प्रदर्शन किया। धरने की अध्यक्षता करते हुए प्रधान रेशमा ने कहा कि सरकार द्वारा पिछले दो साल से हमें मानदेय भी नहीं दिया जा रहा। लगातार 6 घंटे सरकार द्वारा काम लेने पर भी उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। वर्करों को मात्र 3 हजार रुपये और 15 सौ रुपये हेल्पर को दिया जाता है जो कि पिछले 2 साल से सरकार द्वारा रोका गया है। सेंटर का किराया, रजिस्टर और सेंटर चलाने के अन्य समान वर्कर अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों को बार-बार अवगत करवाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। धरने में संध्या, जानकी, कमला, रेशमा, सुमित्रा, दर्शना, सीमा, पुष्पा, निर्मला आदि मौजूद थी।