गाय के गोबर और मूत्र से बनाया ‘घनजीवामृत’ खाद
भिवानी। शहर के पतराम गेट स्थित गोशाला में गाय के गोबर और मूत्र से प्राकृतिक खाद तैयार किया गया है। इस खाद के प्रयोग करने के बाद खेत में रासायनिक खाद और कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस खाद को घनजीवामृत का नाम दिया गया है। भिवानी महापंचायत के संरक्षक बृजलाल सर्राफ की देखरेख में कृषि अनुसंधान कर्ता डॉ. वजीर सिंह ने घनजीवामृत तैयार किया है। गोशाला ने घनजीवामृत खाद के 1100 पैकेट तैयार किए गए हैं, इन पैकेटों को 17 फरवरी को एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक में होने वाले किसान सम्मेलन में वितरित किया जाएगा।
--
ऐसे तैयार होता है घनजीवामृत
डा. वजीर सिंह ने बताया कि घनजीवामृत के लिए किसानों को बाजार से कुछ खरीदने की आवश्यकता नहीं है। रासायनिक खाद और कीटनाशक आदि पर एक पैसा भी खर्च किए बिना केवल देसी गाय के गोमूत्र व गोबर से इसे तैयार किया जाता है।
खाद बनाने के लिए 100 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, एक किलोग्राम गुड़, दो किलोग्राम बेसन तथा खेत की एक मुट्ठी मिट्टी और गाय का मूत्र दो लीटर इस्तेमाल होता है। इस मिश्रण को दो से चार दिन तक छाया में सुखाया जाता है। तैयार घनजीवामृत 6 माह तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए केवल देसी गाय का गोबर ही इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि उसमें नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक होती है।
--
खर्च जीरो, लाभ ही लाभ
डा. वजीर सिंह ने बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक खेती से घटते जलस्तर पर रोक लग सकेगी। क्योंकि रासायनिक दवाइयों और कीटनाशक बेहद गर्म होते हैं। जोकि अत्यधिक पानी की खपत मांगते हैं। इसके अलावा जीरो बजट प्राकृतिक खेती किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है क्योंकि इसमें किसान को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता और उसकी फसल भी अच्छी होती है।
--
घनजीवामृत खाद का प्रयोग कर किसान अपने खेत को उपजाऊ बना सकता है। वहीं, रासायनिक, खाद और कीटनाशक दवाइयों होने वाले खर्च को भी बता सकता है। इस खाद के प्रयोग से किसान अपनी खेती जीरो बजट में कर सकता है।
- डा. वजीर सिंह, कृषि अनुसंधान कर्ता
--
17 फरवरी को रोहतक में होगा एक किसान एक जवान सम्मेलन
शून्य लागत प्राकृतिक खेती के जनक पदमश्री सुभाष पालेकर और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से प्रेरणा लेकर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया तथा छात्रों ने भी जीरो बजट खेती को जन-जनतक पहुंचाने के लिए अभियान छेड़ा है। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए तीन प्रशासनिक कमेटियां भी गठित की है। विश्वविद्यालय द्वारा 17 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर में किसान सम्मेलन का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्वयं हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत तथा सुभाष पालेकर 11 सौ किसानों को एक साथ जीरो बजट खेती की ट्रेनिंग देंगे। सम्मेलन में समूचे क्षेत्र से आए 11 सौ किसानों को एक-एक एकड़ के लिए घनजीवामृत वितरित किया जाएगा।