भिवानी। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के कारण कहीं बिना कंडक्टर के बस दौड़ाई जा रही है तो कहीं सक्षम युवाओं को ही कंडक्टर बना दिया गया। चालकों की कमी के चलते चार पुलिस कर्मियों को रोडवेज बसों का स्टेयरिंग थमाया गया। जिसके बावजूद मात्र 12 बसें ही सड़क पर दिखीं। 169 में से महज आठ ड्राइवर और 145 कंडक्टर में से तीन कंडक्टर ही ड्यूटी करते दिखे। वहीं पांचवें दिन भी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के साथ शहर में रोष प्रदर्शन किया और विधायक आवास का घेराव किया। यहां कर्मचारियों और पुलिस में धक्का-मुक्की भी हुई।
रोडवेज कर्मचारी शनिवार को लगातार पांचवें दिन हड़ताल पर रहे। जिसका व्यापक असर देखने को मिला। कंडक्टर नहीं मिलने पर शनिवार को सुंगरपुर के लिए बिना कंडक्टर के ही बस चली। कंडक्टर नहीं होने से यात्रियों ने फ्री बस सेवा का लाभ उठाया। इसी तरह चार बसों पर पुलिस कर्मचारियों को चालक बनाकर भेजा गया। कंडक्टर की जगह सक्षम युवाओं ने बैग उठाकर टिकटें काटी। पांच दिन में रोडवेज को करीब 50 लाख का घाटा हो चुका है।
रोडवेज बसें चला रहे चार चालक ऐसे भी है, जिनका ट्रांसफर कहीं और कर दिया गया था। उन चालकों ने ज्वाइन करने की बजाए कोर्ट केस किया। जहां से उनका ट्रांसफर निरस्त कर दिया गया। उसके बावजूद उन्हें भिवानी डिपो में तैनाती नहीं मिली। लेकिन रोडवेज कर्मियों की हड़ताल की वजह से उन कर्मियों को बगैर तैनाती दिए रोडवेज बसें चलवाई जा रही है।
आज परिवार समेत सड़क पर उतरेंगे कर्मी
भिवानी। रोडवेज कर्मचारियों ने लगातार पांचवें दिन प्रदर्शन कर रोष जताया। विभिन्न जनसंगठनों व विपक्षी पार्टियों ने समर्थन दिया। सर्व कर्मचारी संघ के कार्यवाहक जिला प्रधान नरेन्द्र दिनोद, सचिव मा. सुखदर्शन सरोहा ने बताया कि सभी कर्मचारी सुबह नेहरू पार्क में एकत्रित हुए। यहां से प्रदर्शन करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए विधायक आवास पहुंचे और विधायक आवास का घेराव किया। विधायक आवास पर पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। यहां विधायक को ज्ञापन सौंप प्राइवेट बसों के परमिट रद्द कराने की मांग की। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि उनकी कोई आर्थिक मांग नहीं है उनकी सीधी लड़ाई निजीकरण के खिलाफ है। सरकार ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में प्रदेश में 2 लाख पक्के रोजगार का वादा किया था, आज सरकार सरकारी विभागों का निजीकरण किया जा रहा है। प्रदर्शन में ओमप्रकाश, ईश्वर शर्मा, रामोतार खोरड़ा, यूटीयूसी, रतन लोहिया, जेपी कौशिक, राहुल सरोहा, रामनिवास शर्मा, संजय मिश्रा, अनिल आदि विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने समर्थन किया। साथ ही निर्णय लिया कि रविवार को सभी कर्मचारी अपने परिवार के साथ सड़क पर उतरेंगे।