बहल। प्रदेश सरकार ने गांव के गौरवशाली इतिहास, देश हित में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों व खास शख्सियतों की जानकारी देने के लिए प्रत्येक गांव में गौरव पट्ट बनाए थे। लेकिन, बहल खंड के 28 में से 9 गांवों में ही इन गौरव पट्ट पर गौरव गाथा अंकित हो पाई है। शेष 19 गौरव पट्ट निर्माण के छह महीने बाद भी गौरव गाथा अंकित करवाने के इंतजार में हैं। विभाग ने एक गौरव पट्ट पर करीब 70 हजार रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की है।
गौरव गाथा लिखने के इंतजार में खाली पड़े ये गौरव पट्ट पर अब विभिन्न संस्थानों के इश्तिहारों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जबकि पंचायत विभाग का कहना है कि उनको जैसे-जैसे पंचायतों से गाथा मिलेगी वैसे-वैसे इन पर गाथा अंकित करवा दी जाएगी। प्रदेश सरकार ने अपने एक फैसले में गांवों में गौरव पट्ट लगाने का निर्णय किया था। इसके पीछे सरकार का मकसद था कि बाहर से आने वाले लोगों को जहां गांव के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकेगी वहीं उन वीर सैनिकों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी। इसके अलावा इन पट्टों पर वर्तमान में उच्च पदों पर आसीन गांव के अधिकारियों, खिलाड़ियो के नाम अंकित किए जाने है ताकि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके।
इन नौ गांवों में लिखी है गौरव गाथा
बहल खंड की 28 ग्राम पंचायतों में गौरव पट्टों का निर्माण हुए छह महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। इनमें गांव पातवान, सुरपुरा कलां, सुरपुरा खुर्द, चैहड़ खुर्द, सिरसी, सेरला, हरियावास, गोकलपुरा, कासनी कलां में ही गौरव गाथा लिखी गई है जबकि बहल सहित 19 गांवों के गौरव पट्ट अभी भी अपने सीने पर गौरव गाथा अंकित करवाने के लिए बेताब है।
गौरव गाथा के बिना खाली पड़े गौरव पट्ट बन रहे है इश्तिहारी पट्ट
गौरव पट्ट की चारों साइडों पर विभाग के निर्देशानुसार गौरव गाथा अंकित की जानी है। पट्ट के एक तरफ गांव के स्वतंत्रता सेनानियों व वीर शहीदों के नाम लिखे जाने है तो दूसरी तरफ गांव के गौरवशाली इतिहास का वर्णन लिखा जाना है। लेकिन, निर्माण के छह महीने बाद इन गौरव पट्ट का प्रयोग विज्ञापन पट्ट के रूप में किया जा रहा है। खाली पड़े पट्टों पर विभिन्न संस्थानों ने अपने पोस्टर चस्पा कर दिए हैं।
खंड के 9 गांवों में गौरव पट्ट पर ही गौरव गाथा लिखी गई है। बाकी पंचायतों से जैसे जैसे गौरव गाथा आएगी उसे संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और गौरव गाथा अंकित करवा दी जाएगी। इस काम को जितना जल्दी हो सकेगा, पूरा करवाया जाएगा’
रविंद्र दलाल, बीडीपीओ, बहल।
प्रदेश सरकार की योजनाएं केवल वाहवाही वाली है क्योंकि आज तक कोई भी योजना पूरी तरह से क्रियांवित नहीं हो पाई है। सीएम ने बहल क्षेत्र के विकास के लिए जितनी घोषणाएं अधूरी हैं। सरकार ने इतने पैसे लगाकर गौरव पट्ट बनाए है तो उस पर गौरव गाथा भी अंकित करवाए।
ओमप्रकाश बड़वा, विधायक, लोहारू।