फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब अस्पताल, स्कूल-कॉलेजों में होगी फायर सेफ्टी की जांच

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
भिवानी। गुजरात के सूरत में हुए अग्निकांड के एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद अब जिला प्रशासन ने अलर्ट करते हुए सभी अस्पताल, स्कूल-कॉलेजों में आग से सुरक्षा की व्यवस्थाओं की जांच करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय करने के अलावा विभिन्न टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें तीन दिन में सभी स्कूल-कॉलेजों और अस्पतालों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी। मगर सूत्र बताते हैं कि अधिकतर स्कूल-कॉलेजों और अस्पतालों में आग से सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
गुजरात के सूरत शहर में मई में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी। जिसमें करीब 20 बच्चों की मौत हो गई थी। इस बारे में शिक्षा निदेशालय की ओर से उस समय तत्कालीन उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को सुरक्षा जांचने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विभाग अब मामले को लेकर गंभीर हुआ है। एसडीएम ने जिला शिक्षा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक कर सभी को तीन दिन के अंदर पूरी जांच करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अलग-अलग विभाग अनुसार टीमें बनाई गई हैं। हरेक टीम में दमकल विभाग का एक कर्मचारी और संबंधित विभाग का एक कर्मचारी शामिल रहेगा।
विज्ञापन


सरकारी संस्थाओं में भी नहीं है सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सुरक्षा मानक जांचने के निर्देश तो जिला प्रशासन की ओर से दे दिए गए हैं, मगर सरकारी स्कूल, अस्पताल में ही सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। सरकारी स्कूलों की बात की जाए तो ऐसे स्थानों पर चल रहे हैं जिनके भवन वर्षों पुराने हैं। यहां आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। वर्ष 2008-09 में सरकारी स्कूल के फायर फाइटिंग सिस्टम के तहत आग बुझाने वाले यंत्र खरीदे गए थे। उसके बाद से उनकी कोई सुध नहीं ली गई। कुछ सरकारी स्कूल तो खंडहर भवनों में चल रहे हैं।
40 लाख से अस्पताल में बना प्लांट, नहीं हुआ हैंडओवर
वर्ष 2008 में सामान्य अस्पताल भिवानी को मॉडल अस्पताल बनाने के लिए चुना गया था। उस समय अस्पताल परिसर में पीछे की ओर से करीब 40 लाख का फायर फाइटिंग सिस्टम तैयार किया गया था। पूरे अस्पताल परिसर, सिविल सर्जन कार्यालय की विभिन्न शाखाओं में लाइनें बिछाई गई थी। अलार्म सिस्टम सेट किए गए थे। एलएंडटी कंपनी के पास इसका ठेका था। बाद में कंपनी कार्य अधूरा छोड़कर चली गई। इस पर लंबे समय तक विवाद भी चला और आज तक भी फायर फाइटिंग का पूरा सिस्टम हैंडओवर नहीं हुआ है। केबिन में लगाई बड़ी-बड़ी मशीनें जंग खा चुकी हैं और इनके चलने पर भी संशय है।
कोचिंग सेंटरों और कई प्राइवेट स्कूलों में भी नहीं व्यवस्था
आग लगने पर बचाव के लिए कोचिंग सेंटरों और कई प्राइवेट अस्पतालों में भी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ये असुरक्षित है और यहां हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है। कोचिंग सेंटर तो अधिकतर किराये पर चल रहे हैं। ऐसे में यहां भवनों में ज्यादा छेड़छाड़ भी कोचिंग सेंटर संचालक नहीं कर सकते।

फायर सेफ्टी की व्यवस्था जांचने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। जल्द से जल्द पूरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जहां आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने वहां व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अजय चौपड़ा, एसडीएम

शहरी दायरे में आने वाले सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों व कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी प्रबंधों की जांच के लिए भिवानी खंड शिक्षा अधिकारी नरेश महता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा सभी शिक्षण संस्थानों के अंदर फायर सेफ्टी प्रबंधों की जांच के सख्त आदेश दिए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट तीन दिन के अंदर प्रशासन को सौंपी जाएगी। जिन संस्थानों में प्रबंध अधूरे मिलेंगे, इस संबंध में भी कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।
विज्ञापन

- अजीत श्योराण, जिला शिक्षा अधिकारी भिवानी।

सभी सरकारी और निजी स्कूलों के अंदर बच्चों की सुरक्षा और फायर सेफ्टी प्रबंधों को लेकर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को शिकायत भेजी थी। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी इस मसले पर शिकायत भेजकर इसकी जांच कराने की मांग उठाई है। क्योंकि अधिकांश शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं हैं, सूरत जैसे हादसे भिवानी में न हो, इसके लिए भी जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजी गई है।
-बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें